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कश्मीर को फिर जन्नत बनने में लगेगा वक्त?

Fri, 19 Sep 2014 12:42 PM IST
Updated Fri, 19 Sep 2014 12:42 PM IST
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take a long time to Kashmir become heaven?

कभी धरती का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर को अपना यह मुकाम दोबारा हासिल करने में अब लंबा वक्त लग सकता है।

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वजह है कि राज्य सरकारों ने घाटी में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए न तो पारंपरिक तौर-तरीकों को तवज्जो दिया गया और न ही नई तकनीकों के पर्याप्त इस्तेमाल को बढ़ावा ही दिया।

हश्र यह हुआ है कि पिछले 50 सालों में घाटी में जितनी संपन्नता आई, वह एक झटके में ही बाढ़ के साथ बह गई।

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के सदस्य एम सलीम बेग कहते हैं कि घाटी में राजनेता हमेशा राजनीति चमकाने में लगे रहे। कभी रखरखाव या बाढ़ की समस्या पर उनका ध्यान नहीं रहा।
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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य के बाढ़ नियंत्रण विभाग से काम लेना काफी पहले बंद हो चुका है। एक समय था जब बांध की देखभाल करने वाले (बॉर्न वाचर) सक्रियता से अपने काम में जुटे रहते थे।
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वे बांधों के रखरखाव का पूरा ख्याल रखते थे। दरिया के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाती थी। क्योंकि पूरे कश्मीर में बाढ़ नियंत्रण के लिए बॉर्न बने हुए हैं। लेकिन अब उनसे काम नहीं लिया जा रहा है।

नई तकनीकों की अनदेखी

take a long time to Kashmir become heaven?

तो दूसरी ओर बाढ़ के पानी को हटाने की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है। बेग कहते हैं कि लोगों को बाढ़ से निकालने, भोजन और दवाइयों की व्यवस्था हो रही है। लेकिन 11 दिन गुजरने के बावजूद राज्य में पंपिंग सेट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी।

अगर सरकार इस ओर ध्यान देती तो शहर से पानी निकाला जा सकता था। गंदगी साफ हो सकती थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा। बेग के मुताबिक ,जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर पुनर्वास कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में स्थिति बद से बदतर हो सकती है।

बेग का कहना है कि राज्य सरकार को अच्छे इंजीनियरों को नियुक्त करने, बाढ़ अलर्ट सिस्टम को विकसित करने, परंपरागत तरीकों को अपनाने के साथ तकनीक का पूरा इस्तेमाल करने पर सोचना चाहिए। वाटर चैनल्स की समीक्षा और जल निकासी के रास्ते में होने वाले अतिक्रमण को हटाने पर गंभीरता से पहल होनी चाहिए। अनुमानित तौर पर घाटी में एक लाख घर बाढ़ की चपेट में हैं।

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