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ताज महल मुहब्बत की निशानी या नफरत की?

Wed, 25 Jun 2014 09:19 PM IST
गीता पांडे/संवाददाता, बीबीसी
गीता पांडे/संवाददाता, बीबीसी Updated Wed, 25 Jun 2014 09:19 PM IST
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tajmahal is made for love on doubt

ताजमहल के बारे में अक्सर कहा जाता है कि दुनिया के आश्चर्यों में से एक संगमरर की इस इमारत को मुग़ल शासक शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में 17वीं सदी में बनवाया था।

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लेकिन, हाल ही में भारत में हुए एक नए नाटक में इस ऐतिहासिक घटना में एक नाटकीय और अनअपेक्षित मोड़ दे दिया गया है। शाहजहां-ओ-मुमताज का प्रोडक्शन बताता है कि प्रेमियों के इस स्वर्ग में सब कुछ ठीक नहीं था।
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इस नाटक को दिलीप हीरो ने मूल रूप से अंग्रेज़ी में 1970 के दशक में 'द टेल ऑफ़ ताज़' के शीर्षक से लिखा था।

हीरो लंदन के एक लेखक, नाटककार एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बताया कि यह नाटक साम्राज्य की सबसे बड़ी शक्ति यानी राजगद्दी को हासिल करने के बारे में है।

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14वें बच्‍चे को जन्म देते वक्त हुई मौत

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मुमताज शाहजहां की तीसरी और सबसे प्रिय पत्नी थीं और उनकी प्रेमकथा एक गाथा है।

सामान्यतः माना जाता है कि वो बहुत खूबसूरत और समर्पित पत्नी थीं, लेकिन बहुत ज़्यादा बच्चे पैदा करने को लेकर उनका पति से मतभेद भी था। मुमताज की मृत्यु 14वें बच्चे को जन्म देते हुए हुई थी।

दिल्ली के एक नाटक ग्रुप पीएरोट्स ट्रुप से जुड़े और नाटक के निर्देशक एम सईद आलम कहते हैं, ''उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू भी था, जो लोग बहुत ज़्यादा नहीं जानते हैं। वो वाकई सुंदर और आज्ञाकारी नहीं थीं। वो शतरंज की बहुत बेहतरीन खिलाड़ी थीं, शाहजहां से भी बेहतर। वो महत्वाकांक्षी और निष्ठुर भी थीं।''

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर फरहत हसन कहते हैं, ''मुमताज के पास अच्छी ख़ासी राजनीतिक ताक़त थी और ऐतिहासिक दस्तावेज़ इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रशासनिक मामलों और सरकारी आदेशों में उनका दख़ल था।''

मुमताज की संदिग्ध मृत्यु

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नाटक की शुरुआत शाहजहां और उनके भाई के बीच शहंशाह बनने को लेकर प्रतिद्वंद्विता से होती है। मुमताज ने अपने पति की जीत में उनके प्रतिद्वंद्वी को ज़हर देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जैसे जैसे नाटक आगे बढ़ता है मुमताज के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलू सामने आते हैं।

आलम कहते हैं, ''वो एक दूरदर्शी राजनीतिक चिंतक, एक चतुर रणनीतिकार व योजनाकार थीं। एक ऐसी महिला जो पर्दे के पीछे तो थीं, साथ ही अपने पति से आगे भी थीं।''

शाहजहां को मुमताज से डर था?

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इस नाटक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वो है जिसमें एक शाम गर्भवती मुमताज को शाहजहां के साथ शतरंज खेलते हुए दिखाया गया है जिसमें वो राजगद्दी की शर्त लगाती हैं और जब शाहजहां हार जाते हैं तो राजगद्दी की वो हक़दार हो जाती हैं और उनकी महत्वाकांक्षा व निष्ठुरता बेलगाम हो जाती है।

शहंशाह को लगने लगता है कि उनकी प्यारी रानी को रोकना ही होगा और शाही मुहर का झगड़ा उनके राजगद्दी से हटने के साथ ही ख़त्म हो जाता है और जल्द ही प्रसव के दौरान मुमताज की मृत्यु हो जाती है।

लेकिन, यह महज़ दुर्घटना थी या उन्हें इस ओर धकेला गया था? नाटक यहीं समाप्त हो जाता है।

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