फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   taj tourists facing trouble due to uphold corridor construction work

कॉरीडोर की ‘कब्र’ से ताज हो रहा है शर्मसार

Tue, 06 Nov 2012 12:14 PM IST
नीरज शर्मा/आगरा
नीरज शर्मा/आगरा Updated Tue, 06 Nov 2012 12:14 PM IST
विज्ञापन
taj tourists facing trouble due to uphold corridor construction work

इलाहाबाद उच्च न्यायालय से पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को राहत भले मिल गई हो लेकिन विवाद के बाद काम बंद होने से ‘कब्रगाह’ में तब्दील ताज हेरिटेज कॉरीडोर अब ताजमहल की खूबसूरती पर बदनुमा दाग बन गई है। ये हालात तब है जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कृष्ण महाजन कमेटी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी सुधार के निर्देश दे चुके हैं।  

विज्ञापन


क्या था ताज कॉरीडोर प्रोजेक्ट
ताज हेरिटेज कॉरीडोर प्रोजेक्ट मायावती शासनकाल में 2003 में बना। इसके तहत ताजमहल, महताब बाग, आगरा किला, एत्माउद्दौला, चीनी का रोजा और रामबाग जैसे यमुना तट पर बने सभी ऐतिहासिक स्मारकों को एक दूसरे से जोड़ना था। यमुना के किनारे को हरियाली और लाइटिंग से आकर्षक बनाने और कुछ दुकानों के निर्माण का भी प्रस्ताव था। यह विकास पर्यटकों को लुभाने और उनके लिए जरूरी सुविधाओं को ध्यान में रखकर की जानी थीं।
विज्ञापन


विवाद में फंसा प्रोजेक्ट
योजना पर एनपीसीसी कंपनी ने ताजमहल के पार्श्व में यमुना की तलहटी में खोदाई शुरू करा दी। पत्थर साइट पर पहुंचने लगे। दिन रात बुल्डोजर, ट्रक, ट्रैक्टरों और सैकड़ों मजदूर काम में जुट गए। लेकिन काम के लिए अनुमति पत्र मांगने पर कंपनी के अफसर उसे पेश नहीं कर सके। तब तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् केके मुहम्मद ने कंपनी के खिलाफ थाना ताजगंज में तहरीर दे दी। मामले ने तूल पकड़ा और काम बंद हो गया। तब तक सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में रिट भी दायर कर दी गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कॉरीडोर का मौजूदा हाल
कॉरीडोर का निर्माण कार्य तो बंद हो गया लेकिन जहां यह काम शुरू हुआ था वहां जमीन उबड़-खाबड़ हो चुकी है। वहां कूड़ा डाला जा रहा है। मरे जानवर भी डाल दिए जाते हैं। यही नहीं, तमाम लोगों ने उस स्थल को कब्रगाह बना दिया है। बच्चों के शवों को कॉरीडोर स्थल पर दफनाया जाता है। यहां से धूल के गुबार उठते हैं, जो सीधे ताज से टकराते हैं। यहीं मंटोला नाला सीधे यमुना में गिरता है। इससे शहर और ताजमहल की छवि खराब हो रही है।


सिफारिशों को लग रहा पलीता
वर्ष 2006 में कृष्णा महाजन समिति ने कॉरीडोर निर्माण स्थल के सुधार के लिए लैंड स्केपिंग, ग्रीनरी, निर्माण सामग्री हटाने, मंटोला नाले को नदी में सीधे गिरने से रोकने आदि की सिफारिशें की थी। कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने करीब 42 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया। लेकिन अब तक कोई काम नहीं हुआ है। पिछले दिनों मांट जाते वक्त मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पौधारोपण और सुधार के निर्देश दिए थे। एडीए वीसी लाल बिहारी पांडे ने बताया कि चंद रोज पहले सभी विभागों की एक बैठक हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed