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ताज कॉरिडोर: बढ़ सकती हैं मायावती की मुश्किलें
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jan 2013 10:37 PM IST
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ताज कॉरिडोर मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें बसपा प्रमुख और उनकी सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। क्योंकि गवर्नर की ओर से उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी गई थी।
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सर्वोच्च अदालत में लखनऊ निवासी कमलेश वर्मा की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 2007 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रकाश सिंह बादल के मामले में दी गई व्यवस्था पर गौर नहीं किया। जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत आने वाले षड्यंत्र, धोखाधड़ी व अन्य आरोपों के खिलाफ कार्यवाही के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है।
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इसके बावजूद हाईकोर्ट ने जून 2007 के विशेष अदालत के आदेश को जारी रखा। याद रहे कि 5 नवंबर 2012 को हाईकोर्ट ने मायावती और सिद्दीकी को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की मांग वाली छह याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
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हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील के बाद यह तय है कि सर्वोच्च अदालत को मायावती के ताज कॉरिडोर और आय से अधिक संपत्ति दोनों ही मामलों में निर्णय देना है। पूर्व मुख्यमंत्री के आय से अधिक संपत्ति मामले में सर्वोच्च अदालत में पुनर्विचार याचिका पहले से ही लंबित है। हालांकि शीर्षस्थ अदालत ने संपत्ति मामले में उन्हें राहत दी थी। मगर अब वह अपने ही फैसले पर दोबारा से विचार करने को राजी हो गया है।
अपील में याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि हाईकोर्ट इस सवाल पर भी गौर करने में असफल रहा कि गवर्नर की ओर से मुकदमा चलाने की मंजूरी न देना सही था या गलत। जबकि सर्वोच्च अदालत प्रकाश सिंह बादल के मामले में यह साफ कर चुका है कि लोक सेवक के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-ब, 409, 420, 467, 468 और 471 के आरोप में मुकदमा चलाए जाने के लिए मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट को मुकदमा चलाने की मंजूरी देनी चाहिए थी, जबकि उसकी ओर से याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने विशेष जज सीबीआई के उस आदेश को कानून सम्मत करार दिया था जिसमें मायावती व सिद्दीकी को अभियोजन स्वीकृति के अभाव में मुकदमे की कार्यवाही से छूट प्रदान की गई थी। सीबीआई अदालत के फैसले को वर्मा, अनुपमा सिंह, काशीप्रसाद यादव, मोहम्मद कातील अहमद, शचींद्र प्रताप सिंह और ममता सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।