मोदी के राज में इस दागी अधिकारी की मौज!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अच्छे दिन आने का भले ही दावा किया जा रहा हो, लेकिन केंद्रीय भूतल परिहवन एवं राजमार्ग मंत्रालय में शायद इसका असर नहीं है।
मंत्रालय की सड़क शाखा में एक ऐसे दागी अधिकारी को भरपूर अधिकारों से लैस कर दिया गया है, जिनपर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।
सीवीसी की सिफारिश आते ही कायदे से उस अधिकारी को दंडित कर उन्हें सभी तरह के वित्तीय कामकाज, खास कर ठेकों से दूर रखना था, लेकिन वह अधिकारी इस समय करीब 25 राज्यों की हजारों करोड़ रुपये की परियोजना को देख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक डीओ तावडे भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के करीबी माने जाते हैं, इसलिए सीवीसी के दंड के बावजूद उन्हें दंडित करना तो दूर, उन्हें सड़क शाखा में बेहद महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया गया है।
सीवीसी ने लगा रखा है भारी जुर्माना
तावडे इस समय करीब 25 राज्यों की हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को देख रहे हैं और इनके पास 1000 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृत करने का अधिकार है। कुछ अधिकारी तो यह भी कहते हैं कि तावडे को एडीजी/रोड बनाने की तैयारी चल रही है।
हालांकि अधिकारियों के इन दावों की जांच अमर उजाला नहीं कर पाया है। सीवीसी से जुड़े सूत्र बताते हैं जिस अधिकारी के खिलाफ दंड की सिफारिश की जाती है, उसे ठेकों की मंजूरी तो दूर, वित्तीय कामकाज भी नहीं करने दिया जाता है।
तावडे के मामले में सीवीसी की सिफारिश पर अभी तक अमल क्यों नहीं हुआ है, यह बात उनके समझ से भी परे है।
क्या है मामला?
सीवीसी ने दो सितंबर 2014 को भेजे एक ऑफिस मेमोरंडम में एनएच-3 पर महाराष्ट्र में वाडापे से गोंडे के बीच हुए कार्य में हुई भारी अनियमितता पर पांच अधिकारियों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।
इन अधिकारियों को मंत्रालय के सीवीओ ने जो दंड दिया था, उसे अपर्याप्त बताते हुए सीवीसी ने दंड बढ़ा दिया था।
इनमें मंत्रालय की सड़क शाखा में इस समय मुख्य अभियंता (समन्वय) के पद पर तैनात डीओ तावडे का भी नाम है जो कि पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मुंबई में सीजीएम/आरओ थे। इस समय उनकी तैनाती मंत्रालय में हो गई है।