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कालाधनः HSBC बैंक पर पुलिस का छापा

Wed, 18 Feb 2015 10:38 PM IST
Updated Wed, 18 Feb 2015 10:38 PM IST
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swiss police raids on HSBC Bank in geneva

एचएसबीसी बैंक की जेनेवा शाखा में हवाला का पैसा जमा होने के आरोपों की जांच के लिए स्विट्जरलैंड पुलिस ने छापेमारी की है। पिछले दिनों बैंक के खाताधारकों की सामने आई एक सूची में 1195 भारतीयों के भी नाम थे।

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इस शाखा में दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों के खाते हैं। स्विस प्रशासन एचएसबीसी प्राइवेट बैंक के साथ उन लोगों के खिलाफ जांच कर रहा है जिन पर हवाला का पैसा रखने का आरोप है।
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स्विस अभियोजन कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि एचएसबीसी प्राइवेट बैंक (स्विट्जरलैंड) के बारे में हाल में हुए खुलासे के बाद जन अभियोजक ने बैंक के खिलाफ हवाला का पैसा जमा करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है।
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बैंक में हवाला का पैसा जामा होने के आरोप

swiss police raids on HSBC Bank in geneva

इस बैंक पर अपने ग्राहकों को कर चोरी करने के तरीके बताने का भी आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले की जांच में प्रगति के अनुसार इसका दायरा बढ़ाया जाएगा।

हालिया खुलासे में दावा किया गाय था कि एचएसबीसी की स्विस शाखा के दो सौ से अधिक देशों के ग्राहक हैं, जिन्होंने बैंक में 119 अरब डॉलर से भी अधिक की राशि जमा करवाई है।

एचएसबीसी ने भी स्वीकार किया है कि पूर्व में उसके स्तर पर कुछ कमियां रहीं। बैंक में हाल में समाचार पत्रों में एक पूरे पृष्ठ का विज्ञापन दिया था। विज्ञापन में पूर्व की घटनाओं पर खेद जताया गया है।

एचएसबीसी पर कवरेज को लेकर टेलीग्राफ के स्तंभकार का इस्तीफा

swiss police raids on HSBC Bank in geneva

एचएसबीसी कर घोटाले के कवरेज को लेकर ब्रिटेन के सबसे बड़े स्तंभकारों में से एक और इस अखबार के मुख्य राजनीतिक विश्लेषक पीटर ओबोर्ने ने दैनिक टेलीग्राफ से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एचएसबीसी मामले की सिलसिलेवार कवरेज को अखबार ने प्रबंधन के दबाव में आकर रोक दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि बीते कुछ दिनों से एचएसबीसी की इस धोखाधड़ी को लेकर की गई उनकी खबरें जानबूझ कर दबा दी गईं। उन्होंने इसे लेकर समाचार पत्र के गाइडलाइंस की स्वतंत्र समीक्षा किए जाने की भी मांग की। उन्होंने अपने एक लेख में कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है।

उनकी पहुंच हमारे लोकतंत्र के करीब तक हो गई है। इसे और अधिक उपेक्षित नहीं किया जा सकता। उन्होंने बीबीसी को कहा कि इस मामले में ‘द डेली टेलीग्राफ’ को एक स्वतंत्र समीक्षा करनी होगी।

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