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खाताधारकों के नाम छुपाने में जुटे स्विस बैंक

Mon, 03 Nov 2014 12:37 PM IST
एजेंसी, ब्यूरो/बर्न, नई दिल्ली
एजेंसी, ब्यूरो/बर्न, नई दिल्ली Updated Mon, 03 Nov 2014 12:37 PM IST
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swiss banks dont want to disclose names of black money holders.

विदेश में काला धन रखने वाले संदिग्ध भारतीयों के खिलाफ जांच में तेजी को देखते हुए स्विट्जरलैंड के बैंक अपने हित बचाने में जुट गए हैं। बैंक संभावित कानूनी पेचीदगियों से निपटने के लिए अपने बहीखाते में धन की व्यवस्था करने के साथ स्विस सरकार पर अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं।

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सूत्रों के मुताबिक पहले ही कुछ बैंकों की भूमिका सवालों के घेरे में है। इन बैंकों ने काला धन रखने वाले संदिग्ध भारतीयों की चिंताओं को दूर करते हुए उनके धन को सुरक्षित रखने का वादा किया है। स्विट्जरलैंड के दो और यूरोप के एक अन्य बड़े बैंक के खिलाफ पहले ही अनियमितता की जांच हो रही है। इन बैंकों पर काला धन रखने वाले भारतीय कारपोरेट घरानों के धन उनकी सूचीबद्ध कंपनियों में विदेशी निवेश के रूप में लगाने का आरोप है। बाजार नियामक संस्था सेबी कम से कम तीन वैश्विक बैंकों और कई भारतीय कंपनियों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर लेन-देन कर काला धन को सफेद करने के आरोप की जांच कर रही है। इन मामलों में सेबी ने अन्य नियामकों से भी सहयोग लिया है।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 15 से 20 कंपनियों में ऐसे संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि विदेशी बैंकों के कुछ पोर्टफोलियो मैनेजरों ने काला धन रखने वाले भारतीयों को निवेश के जरिए अपने धन भारत ले जाने में सहयोग किया है।

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कांग्रेस पर जेटली का करारा हमला

swiss banks dont want to disclose names of black money holders.

विदेश में काला धन रखने वालों के नाम सार्वजनिक नहीं करने को लेकर सरकार के बचाव में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उतरने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि मामले की जांच कर रही एसआईटी पर्याप्त साक्ष्य इकट्ठा कर सके। उन्होंने कहा है कि नामों का अवैध तरीके से खुलासा करने पर पूरी जांच खतरे में पड़ जाएगी और इससे दोषियों को फायदा होगा।

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर एक पोस्ट में जेटली ने कहा कि सूचनाओं का अवैध खुलासा जांच और आर्थिक परिणामों दोनों पर भारी पड़ेगा। यह पूरी जांच को तबाह कर सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का रुख समझ से परे है। वह यह नहीं चाहती कि जिन खाताधारकों के नाम एसआईटी के पास मौजूद हैं उनके खिलाफ जांच टीम सबूत इकट्ठा कर सके। कुछ अन्य लोग इस बहाने केवल वाहवाही लूटने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी निश्चित तौर पर सच्चाई को समाने लाने में कामयाब होगी। उन्होंने यह भी कहा कि 27 सितंबर 2014 तक एसआईटी को मिले सभी नाम एनडीए सरकार खुद सार्वजनिक कर देगी। इस मामले में एनडीए सरकार का रिकार्ड अनुकरणीय रहा है। वह सच्चाई को सामने लाने के लिए एसआईटी को पूरा सहयोग देना जारी रखेगी।

जेटली ने कहा कि सरकार के सामने नामों का अवैध खुलासा या फिर संधि के हिसाब से खुलासा करने का विकल्प है। संधि के मुताबिक खुलासा उचित होने के साथ फायदेमंद भी होगा। उन्होंने कहा कि संधि के हिसाब से खुलासा करने से साक्ष्य इकट्ठा करने में सहायता मिलेगी। इससे पहले पिछले सप्ताह सरकार ने एक सीलबंद लिफाफे में जेनेवा स्थित एचएसबीसी बैंक के 627 खाताधारकों के बारे में जानकारी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।

काले धन पर आम लोगों से सहयोग लेगी एसआईटी

swiss banks dont want to disclose names of black money holders.

देश-विदेश में जमा काले धन के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी अब लोगों से सीधा सहयोग लेगी। इसके लिए वह जल्द ही अपना आधिकारिक ई-मेल आईडी और फोन नंबर सार्वजनिक करेगी, तकि लोग इसके जरिए जानकारी दे सकें। नई सरकार ने सत्ता संभालते ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काला धन का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व न्यायाधीश अरिजीत पसायत को एसआईटी का उपाध्यक्ष बनाया गया था।

न्यायमूर्ति पसायत ने बताया कि एक हफ्ते में विज्ञापन के जरिए लोगों को आधिकारिक ई-मेल आईडी, डाक पता और फोन नंबर उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि पसायत ने कहा कि एसआईटी को दी जाने वाली जानकारी ठोस होनी चाहिए। मसलन लोगों को काला धन रखने वालों के नाम, पता, बैंक संबंधी विवरण की ठोस जानकारी मुहैया करानी होगी। ठोस जानकारी पर जहां तत्काल कार्रवाई होगी, वहीं अस्पष्ट और आधी अधूरी जानकारी पर कार्रवाई संभव नहीं होगी। जानकारी देने वालों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

इस बीच वित्त मंत्रालय ने जानकारी हासिल करने के लिए पोर्टल शुरू करने की कार्ययोजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान ही कालाधन की बरामदगी और इस पर रोक लगाने के हेतु लोगों के विचार जानने के लिए फीडबैक सर्विस शुरू की थी। अब उसकी योजना इस संबंध में एक पोर्टल शुरू करने की है।

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