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20 साल से नदी तैरकर पढ़ाने जाते गुरुजी
दिल्ली
Updated Fri, 06 Sep 2013 04:28 PM IST
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अभी तक आपने देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बारे में सुना होगा कि वह बचपन में पढ़ने के लिए नदी तैरकर जाया करते थे।
लेकिन आज हमारे देश में ऐसे गुरु भी हैं, जो अपने शिष्यों को पढ़ाने के लिए नदी पार करके स्कूल पहुंचते हैं।
केरल में गणित के शिक्षक ए टी अब्दुल मलिक पिछले 20 साल से नदी पार करके अपने शिष्यों को पढ़ाने जा रहे हैं। केरल के मंजेरी में लोगों के लिए यह उत्सुकता का विषय बना हुआ है।
द हिंदू के मुताबिक अब्दुल मलिक रोज कडालउनडीपुज्जा नदी को पार करके अपना एक घंटे का समय और 30 रुपए भी बचाते हैं।
अब्दुल को नदी पार करने में महज तीन मिनट का समय लगता है। अब्दुल मलिक वर्ष 1992 से नदी पार करके बच्चों को पढ़ाने के लिए एएलएमपी स्कूल पहुंचते हैं।
अब्दुल मलिक ने बताया कि नदी को तैरकर पार करने में अब उन्हें मजा आने लगा है।
अब्दुल मलिक के मुताबिक अगर वह नदी तैर करके स्कूल नहीं जाएंगे, तो स्कूल समय पर नहीं पहुंच पाएंगे, क्योंकि इससे 12 किलोमीटर घूम कर जाना होगा।
अब्दुल मलिक को नदी तैर करके स्कूल जाने का विचार अपने सहकर्मी के एम बापुट्टी से मिला। उन्होंने बताया कि उनके सहकर्मी बापुट्टी हड़ताल होने के समय भी काम जाते थे। उन्होंने ही यह आइडिया दिया।
शुरुआत में घर के लोगों के नदी तैर कर स्कूल जाने के लिए मना किया। पर धीरे-धीरे यह आदत बन गई और अब मजा आने लगा है। अब्दुल अपने स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ तैरना भी सिखाते हैं।
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लेकिन आज हमारे देश में ऐसे गुरु भी हैं, जो अपने शिष्यों को पढ़ाने के लिए नदी पार करके स्कूल पहुंचते हैं।
केरल में गणित के शिक्षक ए टी अब्दुल मलिक पिछले 20 साल से नदी पार करके अपने शिष्यों को पढ़ाने जा रहे हैं। केरल के मंजेरी में लोगों के लिए यह उत्सुकता का विषय बना हुआ है।
द हिंदू के मुताबिक अब्दुल मलिक रोज कडालउनडीपुज्जा नदी को पार करके अपना एक घंटे का समय और 30 रुपए भी बचाते हैं।
अब्दुल को नदी पार करने में महज तीन मिनट का समय लगता है। अब्दुल मलिक वर्ष 1992 से नदी पार करके बच्चों को पढ़ाने के लिए एएलएमपी स्कूल पहुंचते हैं।
अब्दुल मलिक ने बताया कि नदी को तैरकर पार करने में अब उन्हें मजा आने लगा है।
अब्दुल मलिक के मुताबिक अगर वह नदी तैर करके स्कूल नहीं जाएंगे, तो स्कूल समय पर नहीं पहुंच पाएंगे, क्योंकि इससे 12 किलोमीटर घूम कर जाना होगा।
अब्दुल मलिक को नदी तैर करके स्कूल जाने का विचार अपने सहकर्मी के एम बापुट्टी से मिला। उन्होंने बताया कि उनके सहकर्मी बापुट्टी हड़ताल होने के समय भी काम जाते थे। उन्होंने ही यह आइडिया दिया।
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शुरुआत में घर के लोगों के नदी तैर कर स्कूल जाने के लिए मना किया। पर धीरे-धीरे यह आदत बन गई और अब मजा आने लगा है। अब्दुल अपने स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ तैरना भी सिखाते हैं।
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