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क्या पटरी पर आएंगे रिश्ते? सुषमा आज जाएंगी पाक

Tue, 08 Dec 2015 09:16 AM IST
Updated Tue, 08 Dec 2015 09:16 AM IST
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Swaraj is today goingPakistan, hoping to improve relations

भारत और पाकिस्तान के जटिल रिश्तों को एक बार फिर पटरी पर लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के इतर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात और रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मंगलवार को पाकिस्तान रवाना होंगी।

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इस्लामाबाद में अफगानिस्तान पर होने जा रहे 5वें ‘हार्ट ऑफ एशिया’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में सुषमा के साथ प्रतिनिधिमंडल में विदेश सचिव एस जयशंकर भी शामिल होंगे। अपनी इस यात्रा में विदेश मंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगी। दोनों देशों के रिश्तों में नए सिरे से ताजगी लाने के लिए हमेशा की तरह क्रिकेट कूटनीति का भी इस्तेमाल होगा।
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बताया जा रहा है कि सुषमा के पाक दौरे में ही दोनों देशों के बीच तीन एक दिवसीय और दो टी-20 वाली क्रिकेट सीरीज का भी एलान किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले यूपीए सरकार में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने वर्ष 2012 में पाकिस्तान का दौरा किया था। इस दौरे में दोनों देशों ने वीजा उदारीकरण संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्तों में नरमी और गरमी आते रहने का सिलसिला शुरू हुआ।

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साल जाते-जाते पटरी पर आएंगे रिश्ते!

Swaraj is today goingPakistan, hoping to improve relations

साल 2015 जाते-जाते भारत पाक रिश्ते को फिर से पटरी पर चढ़ाने की कोशिशों का गवाह बनता दिख रहा है। कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत पर विदेश सचिव स्तर और जम्मू-कश्मीर को बातचीत के एजेंडे में शामिल करने के विवाद पर टूटी एनएसए स्तर की वार्ता के बाद अचानक दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की दिशा में नए सिरे से पहल की है।

इस क्रम में पहले पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने भारत से बिना शर्त बातचीत की घोषणा की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद बिना किसी तय एजेंडे के पेरिस में नवाज से मुलाकात की। इस मुलाकात में एनएसए स्तर की वार्ता बैंकाक में करने और अफगानिस्तान के सम्मेलन में सुषमा के शिरकत करने पर सहमति बनी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक सुषमा की पाकिस्तान यात्रा में दोनों देशों के रिश्तों की सुधारने की कवायद के क्रम में कई अहम घोषणा हो सकती है। इनमें अरसे से अटके पड़े भारत-पाक क्रिकेट सीरीज पर पहले ही सहमति बन चुकी है। जबकि नवाज-सुषमा मुलाकात में भी रिश्ते सुधारने के लिए कई अहम घोषणा होने की उम्मीद जताई जा रही है। सुषमा खासतौर पर मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई का भी मामला उठाएंगी। सुषमा के साथ इस्लामाबाद जा रहे विदेश सचिव अपने पाकिस्तानी समकक्ष से अलग से बातचीत कर सकते हैं।

आतंकवाद पर पाक का रुख

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माना जा रहा है कि सुषमा के दौरे के बाद दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता का रास्ता भी तैयार हो सकता है। पाक के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने सोमवार को कहा भी सुषमा के साथ समग्र वार्ता की बहाली पर चर्चा की जाएगी, लेकिन भारतीय सूत्रों का कहना है कि आतंकवाद के मसले पर पाक का रुख जानने के बाद ही इस दिशा में कोई कदम बढ़ाया जाएगा।

मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से भारत कहता रहा है कि आतंकवाद और वार्ता दोनों एक साथ नहीं चल सकता।

भारत सरकार की स्वीकृति के बिना अरसे से अटके  क्रिकेट सीरीज पर पहले ही सहमति बनने का दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पेरिस में ही पीएम मोदी अपने पाकिस्तानी समकक्ष को सीरीज पर सहमति दे चुके हैं।

इसकी घोषणा सुषमा के पाकिस्तान दौरे के दौरान होगी। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच 20, 23 और 25 दिसंबर को वन डे और 28 तथा 30 दिसंबर को टी 20 मुकाबला होगा।

सरकार के रुख में बदलाव पर उठे सवाल

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बैंकाक में भारत-पाकिस्तान के बीच रविवार को एनएसए स्तर की गुपचुप बातचीत को लेकर विपक्ष के साथ-साथ अपनों ने भी सरकार से सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने इस बातचीत को धोखा करार देते हुए सरकार पर सार्वजनिक रूप से लिए गए स्टैंड से पलटने का आरोप लगाया है।

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने सरकार से आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ जारी न रहने के अपने पुराने स्टैंड से पलटने का कारण पूछा है। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने सरकार लगातार आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं करने तथा जम्मू-कश्मीर को बातचीत के एजेंडे में शामिल नहीं करने पर जोर देती रही है।

वहीं यशवंत सिन्हा ने कहा कि ‘पाकिस्तान पर सरकार की नीति और स्टैंड यह है कि आतंकवाद तथा वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकती। अब क्या बदल गया? सोमवार को भी जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने सीआरपीएफ पर हमला किया है।’ शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इसे बेकार की कवायद बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना हमेशा से मानती रही है कि पाकिस्तान कभी भारत का विश्वस्त साथी नहीं हो सकता।

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