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'मुसलमान 3 मंदिर दे दें, 39,997 मस्जिदें ले लें', बोले स्वामी

Sun, 10 Jan 2016 11:35 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 10 Jan 2016 11:35 AM IST
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Swamy offers Muslims to leave 3 temples and take 39,997 Mosques

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मंदिर मस्जिद पर नया बयान देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। स्वामी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि हम हिंदू, मुसलमानों को भगवान श्रीकृष्ण का ऑफर कर रहे हैं-वे हमें केवल तीन मंदिर दे दें और बदले में 39,997 मस्जिद रख लें।

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मुझे आशा है कि वह दुर्योधन नहीं बनेंगे। वहीं इससे पूर्व स्वामी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि देश के उत्थान के लिए राम मंदिर का निर्माण करना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘हम मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं जो कहता हूं वह होता है, अब कह रहा हूं कि मंदिर बनेगा।’
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स्वामी हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल द्वारा स्थापित संस्थान अरुंधति वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से डीयू की आर्ट्स फैकल्टी स्थित कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।
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'राजीव का था वादा, राम मंदिर निर्माण को देंगे समर्थन'

Swamy offers Muslims to leave 3 temples and take 39,997 Mosques

‘राम मंदिर जन्मभूमि: उभरते परिदृश्य’ विषय पर आयोजित इस सेमिनार में स्वामी ने इस बात का दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या निर्माण को समर्थन देने का वादा किया था। सेमिनार के दौरान बाहर जमा एनएसयूआई, आइसा, केवाईएस, सीवाईएसएस ने विरोध प्रदर्शन किया।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद वहां एनएसयूआई व एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट भी हुई। पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिये गए 15 छात्रों को बाद में छोड़ दिया गया। छात्र संगठनों ने डीयू के भगवाकरण का आरोप लगाते हुए आयोजन स्थल के बाहर प्रदर्शन किया। स्वामी ने सेमिनार का विरोध करने वालों को असहिष्णु बताया।

विरोध कर रहे लोगों को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि जो विरोध कर रहे हैं उन्हें अपनी राजनीति चमकानी है। वह प्रदर्शन करना चाहते हैं कर सकते हैं, लेकिन उनके कारण कानून व्यवस्था बाधित होती है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि स्वामी अरुंधति संस्थान के अध्यक्ष हैं। दो दिवसीय इस सेमिनार में राम मंदिर से जुड़े तथ्यों, मंदिर से जुड़े कानूनी पहलू, अनुभव व भविष्य विषय पर इतिहासकार, पुरातत्वविद् व कानूनी विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं।

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