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पुण्यतिथि: स्वामी दयानंद ने आर्य समाज से किया क्रांति का शंखनाद

Wed, 31 Oct 2012 02:46 PM IST
इंटरनेट डेस्क/धर्मेंद्र आर्य
इंटरनेट डेस्क/धर्मेंद्र आर्य Updated Wed, 31 Oct 2012 02:46 PM IST
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swami dayanand create revolution by arya samaj

समाज में फैली कुरीतियों और धार्मिक अंधविश्वास से ऊबकर ज्ञान की प्राप्ति के लिए मूलशंकर नाम का एक युवक मथुरा में परम तपस्वी स्वामी विरजानंद के आश्रम में पहुंचा। मूलशंकर ने जब कुटिया का द्वार खटखटाया तो अंदर से स्वामी जी की आवाज आई, 'कौन?' मूलशंकर ने जवाब दिया, 'इसी प्रश्न का तो उत्तर ढूंढ़ने आया हूं।' स्वामी विरजानंद ने तुरंत कुटिया का दरवाजा खोला और युवक को गले से लगाकर कहा, 'मुझे तुम्हारा ही तो इंतजार था।' मूलशंकर नाम का यह युवक कोई और नहीं, बल्कि स्वामी दयानंद सरस्वती थे, जिन्होंने आर्य समाज जैसी क्रांतिकारी संस्था की स्थापना की।

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वेदों की ओर लौटो
स्वामी विरजानंद से ज्ञान प्राप्त करने के बाद महर्षि दयानन्द ने समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों के प्रति लोगों को जागृत करना शुरू किया। उन्होंने जन्म के आधार पर जाति व्यवस्था का विरोध करते हुए कर्म के आधार पर जाति व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। स्वामी दयानंद ने दलितोद्धार, स्त्रियों की शिक्षा, बाल विवाह निषेध, सती प्रथा और विधवा विवाह को लेकर समाज में क्रांति पैदा की। लोगों को वैदिक धर्म से जोड़ने के लिए स्वामी दयानंद ने 'सत्यार्थ प्रकाश' नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में उन्होंने नारा दिया, 'वेदों की ओर लौटो।' 10 अप्रैल 1875 को उन्होंने मुंबई में आर्यसमाज की स्थापना की।
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भारत केवल भारतीयों का है
स्वामी दयानन्द सरस्वती ने केवल आर्य समाज और समाज सुधार के लिए ही काम नहीं किया, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। अंग्रेजों के अधीन भारत में यह कहने का साहस पहली बार स्वामी दयानन्द ने ही किया था कि, 'भारत केवल भारतीयों का है।' 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति की योजना भी स्वामी दयानंद के नेतृत्व में ही तैयार की गई थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पहले स्वामी दयानन्द सरस्वती ने हरिद्वार पहुंच कर पांच ऐसे व्यक्तियों से मुलाकात की, जो आगे चलकर इस क्रांति कर्णधार बने। ये पांच व्यक्ति थे, नाना साहेब, अजीमुल्ला खां, बाला साहेब, तात्या टोपे और बाबू कुंवर सिंह। माना जाता है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले करीब 75 प्रतिशत देशभक्त आर्य समाज की विचारधारा को मानने वाले थे।
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रची गई स्वामी दयानंद की हत्या की साजिश

अपने अंतिम दिनों में वे जोधपुर के महाराज जसवंत सिंह के राज्य में थे। स्वामी दयानंद प्रतिदिन महाराज जसवंत सिंह प्रवचन सुनाते थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि महाराज जसवंत सिंह नन्हीं नामक वेश्या के प्रभाव में हैं और राज्य के कार्यों में भी उस वेश्या हस्तक्षेप रहता है। उन्होंने महाराज को इस बारे में समझाया तो उन्होंने विनम्रता से उनकी बात स्वीकार कर ली और नन्हीं से संबंध तोड़ लिए। इससे नन्हीं स्वामी दयानंद के खिलाफ हो गई।

उसने स्वामी जी के रसोइए कलिया उर्फ जगन्नाथ को अपनी तरफ मिलाकर उनके दूध में पिसा हुआ कांच डलवा दिया। इससे स्वामी दयानंद की हालत बिगड़ने लगी। रसोइया अधिक दिन तक स्वामी दयानंद के साथ गद्दारी नहीं कर सका और एक दिन उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और माफी मांगी। उदार-हृदय स्वामी दयानंद ने उसे जीवन-यापन के लिए पांच सौ रुपए देकर कहा कि तुम यहां से तुरंत भाग जाओ, वर्ना तुम पकड़े जाओगे। बाद में स्वामी दयानंद को जोधपुर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया तो वहां उनका इलाज करने वाला चिकित्सक भी शक के दायरे में रहा। उस पर आरोप था कि वह दवाई के नाम पर स्वामी जी को हल्का जहर देता रहा। माना जाता है कि स्वामी दयानंद की मृत्यु के पीछे अंग्रेज सरकार का भी हाथ था। 31 अक्टूबर 1883 को दीपावली के दिन स्वामी दयानंद की मृत्यु हो गई।


स्वामी दयानन्द के लिए महापुरुषों के विचार
:- सरदार पटेल ने कहा, 'भारत की स्वतंत्रता की नींव वास्तव में स्वामी दयानंद ने डाली थी।'
:- पट्टाभि सीतारमैया के मुताबिक, 'गांधीजी राष्ट्र-पिता हैं, लेकिन स्वामी दयानंद राष्ट्र–पितामह हैं।'
:- श्रीमती एनी बेसेंट ने उनके बारे में कहा, 'स्वामी दयानंद पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत, भारतीयों के लिए की घोषणा की।'
:- फ्रेंच लेखक रोमां रोलां के अनुसार 'स्वामी दयानंद राष्ट्रीय भावना और जन-जागृति को क्रियात्मक रुप देने में प्रयत्नशील थे।'
:- फ्रेंच लेखक रिचर्ड का कहना था कि ऋषि दयानंद का जन्म लोगों को कारागार से मुक्त कराने और जाति बंधन तोड़ने के लिए हुआ था। उनका आदर्श है, आर्यावर्त! उठ, जाग, आगे बढ़। समय आ गया है, नये युग में प्रवेश कर।
:- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वामी दयानंद को 'स्वराज्य का प्रथम संदेशवाहक' कहा।
:- नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वामी दयानंद को 'आधुनिक भारत का निर्माता' बताया।
:- सर सैयद अहमद खां ने कहा, 'स्वामी दयानंद ऐसे विद्वान और श्रेष्ठ व्यक्ति थे, जिनका दूसरे धर्म के लोग भी सम्मान करते थे।'

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