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सू की को लोकतंत्र के लिए भारत से उम्मीदें

Thu, 15 Nov 2012 12:26 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 15 Nov 2012 12:26 AM IST
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suu kyi  hopes for democracy by India

म्यांमार की लोकतंत्रवादी विपक्षी नेता आंग सान सू की अपने देश में पूर्ण लोकतंत्र की बहाली में भारत का ज्यादा सक्रिय समर्थन चाहती हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद जवाहरलाल नेहरू स्मृति व्याख्यान के दौरान नोबेल विजेता सू की ने साफ कहा कि दो देशों के बीच दोस्ती जनता के आपसी जुड़ाव पर होनी चाहिए न कि दो सरकारों के बीच। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि अभी भी उनके देश को लोकतंत्र की मंजिल नहीं मिली है। इसीलिए उम्मीद करती हैं कि म्यांमार के लोकतंत्र का मुकाम हासिल करने के आखिरी सबसे कठिन दौर में भारत जैसा पुराना दोस्त साथ देगा।

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सू की ने अपने बयान से परोक्ष रूप से भारत सरकार को यह संदेश दिया है कि कूटनीतिक रिश्तों की डोर के बीच भारत को वहां की जनता के आंदोलन और आकांक्षाओं पर भी गौर करना चाहिए। सू की ने विज्ञान भवन में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की मौजूदगी में नेहरू व्याख्यान के अंत में भारत से अपनी यह अपेक्षाएं जाहिर की। इस दौरान सू की ने भारत से अपने जुड़ाव और प्यार के कई पहलुओं को भी याद किया।
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म्यांमार की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की अध्यक्ष सू की ने अब तक अपनी भारत यात्रा के दौरान पूछे जा रहे सवालों का हवाला देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि वे जहां भी जा रही हैं उनसे यही पूछा जा रहा कि उनकी अपेक्षाएं क्या है और निराशा क्या है?  उन्होंने कहा कि निराशा और अपेक्षाओं की बहस में पड़ने की बजाय वे यही कहेंगी कि जब दोनों देश दूर हुए तो कठिन समय में हुए। जबकि हमारे दोनों देशों के लोगों का जुड़ाव सदियों पुराना है। इसलिए कहना चाहती हूं कि दोस्ती दो देशों की जनता के बीच होनी चाहिए न कि सरकारों के बीच, क्योंकि लोकतंत्र में तो सरकारें आती जाती रहती हैं।
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इसी संदर्भ में भारत से अपनी अपेक्षाओं को जाहिर करते हुए सू की ने कहा कि हमने लोकतंत्र की मंजिल नहीं पाई है और उम्मीद है कि आखिरी कठिन दौर में इस मंजिल को पाने में भारत का पूरा साथ मिलेगा। इससे पहले दोपहर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सू की की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने म्यांमार में लोकतंत्र बहाली की प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सू की और म्यांमार के राष्ट्रपति थियान सेन के बीच लोकतंत्र बहाली के रोड मैप पर बनी सहमति की सराहना की।

पीएम ने सू की के साहस पूर्ण नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए लोकतंत्र बहाली के उनके अभियान के लिए अपनी शुभकामनाएं दी। सिंह ने नेहरू व्याख्यान के लिए सोनिया गांधी का न्यौता स्वीकार करने के लिए भी सू की का आभार जताया। गौरतलब है कि मई महीने में अपनी म्यांमार यात्रा के दौरान मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी की ओर से सू की को भारत आने का आमंत्रण दिया था। प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान विदेश सचिव रंजन मथाई ने भी सू की से भेंट कर उनसे दोनों देशों के बीच रिश्तों के मौजूदा और भावी रोड मैप को लेकर चर्चा की।


कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बेशक म्यांमार में लोकतंत्र बहाली के प्रयासों में भारत सू की का समर्थन करता है। मगर भारत से सू की उम्मीदें इससे ज्यादा है और नेहरू व्याख्यान के दौरान उन्होंने इसे जाहिर करने में गुरेज नहीं किया। भारत सधे कदमों से जारी कूटनीति और सू की के साथ भावनात्मक दोस्ती के बीच संतुलन रखते हुए म्यांमार के अगले चुनावों पर नजर रख रहा है। इन चुनावों में सू की और उनकी पार्टी का प्रदर्शन उनके साथ और मजबूत तथा ज्यादा सक्रिय रिश्तों की दिशा तय करेगा।

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