पाकिस्तानी नाव में धमाके के बाद दो संदिग्ध नाव और दिखीं
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने 26 नवंबर 2008 जैसे हमले की एक और साजिश को नाकाम करने में सफलता पाई है। भारी विस्फोटकों से लदी कराची से आई नाव गुजरात के पोरबंदर की तरफ बढ़ रही थी जिसे भारतीय सुरक्षा एजेसियों ने समय रहते भांप लिया। जिसके बाद उसका पीछा किया गया। इसकी भनक लगते ही वापिस चल दी।
पीछा कर रही भारतीय कोस्ट गार्ड की टीम जैसे ही नाव के पास पहुंची तो उसने खुद को उड़ा लिया। बताया जा रहा है नाव में कई आतंकी सवार थे जिनका मकसद भारत में 26/11 जैसे हमले को दोहराना था। लेकिन भारतीय एजेसियों की चौकसी के चलते वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके। हालांकि अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि नाव सवार आतंकियों का क्या हुआ।
वहीं दूसरी ओर ताजा खबर ये आ रही है कि उक्त नाव के अलावा क्षेत्र में दो और पाकिस्तानी नाव देखी गई हैं। जिनकी गतिविधियां संदिग्ध बनी हुई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय कोस्ट गार्ड ने उनकी तलाश शुरू कर दी है। बताया गया है कि नाव पर सवार लोगों की बातचीत सुनने के बाद ही उनकी गतिविधियों पर सुरक्षा एजेसियों को शक हुआ।
पाकिस्तानी नाव पर सवार थे 4-5 आतंकी
वाकया 31 दिसंबर की रात का है। गुजरात के पोरबंदर के तट से लगभग 350 नाटिकल मील दूर इस नाव पर कोस्ट गार्ड की निगाह पड़ी। कोस्ट गार्ड ने भारतीय क्षेत्र में घुसने से पहले उसे रुकने को कहा। इस पर नाव सवारों ने उसे वापिस ले लिया।
मामला संदिग्ध देख कोस्ट गार्ड ने उसका पीछा शुरू कर दिया। लगभग एक घंटे तक उसका पीछा करने के बाद जैसे ही कोस्ट गार्ड की बोट उस नाव के नजदीक पहुंचने को हुई तभी नाव सवारों ने विस्फोट कर उसे उड़ा दिया।
दरअसल भारतीय सुरक्षा एजेसियों ने इंटरसेप्टर के जरिए कुछ संदिग्धों की बातचीत सुनी थी। जिसके बाद से ही इस नाव पर निगाह रखी जा रही थी। माना जा रहा है कि नाव पर भारी विस्फोट के साथ आतंकी सवार थे जो भारत में 26/11 जैसी वारदात को दोहराने की फिराक में थे।
खुद को घिरते देख उन्होंने नाव को उड़ा लिया। वहीं इस वारदात के बाद सुरक्षा एजेसियां और चौकन्नी हो गई हैं। हालांकि विस्फोट के बाद उसमें सवार लोगों का क्या हुआ अभी तक यह पता नहीं चल सका है।
एयरक्राफ्ट से रखी गई नाव पर निगरानी
वहीं नाव के भारतीय सीमा में आने के संबंध में कोस्ट गार्ड के डीडीजी केआर नौटियाल ने खुलासा करते हुए बताया कि सुरक्षा एजेसियों से मिले इनपुट के बाद से ही नाव पर निगाह रखी जा रही थी। भारतीय सीमा में आने के बाद कोस्ट गार्ड की ओर से हर तरह के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नाव में सवार लोगों से संपर्क बनाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने बताया कि पोरबंदर से 350 किमी दूर से ही हमने इस पर निगरानी शुरू कर दी थी। इसके लिए हमने अपने एयरक्राफ्ट का भी सहारा लिया। नाव से लगातार मिल रहे संदिग्ध संकेतों के बाद इसका पीछा किया गया। जिसके बाद इसने पकड़े जाने के डर से खुद को उड़ा लिया।
वारदात के सामने आने के बाद लगातार संदिग्ध खतरे की आशंका बढ़ गई है। सुरक्षा विशेष कमर आगा के अनुसार यह संकेत किसी आने वाले बड़े आतंकवादी हमले के भी हो सकते हैं। ऐसे में इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। वहीं अन्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने कोस्ट गार्ड के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी समझदारी और जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी को निभाया।