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मुसीबत में फंसी सरकार तो सुषमा स्वराज ने उबारा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 27 Aug 2013 11:13 AM IST
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2013 में संशोधन के प्रस्तावों पर लोकसभा में सोमवार वोटिंग के दौरान सरकार को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब खाद्य मंत्री प्रो. केवी थॉमस का संशोधन प्रस्ताव बहुमत के अभाव में गिर गया।
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प्रस्ताव गिरने से सरकार स्तब्ध रह गई। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ने का प्रयास किया।
इस बात को लेकर सदन में हंगामा शुरू हो गया, लेकिन ऐन वक्त पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि हंगामा करने के बजाए आगे के संशोधनों पर वोटिंग जारी रखी जाए, जिससे कि बिल पास हो सके।
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साथ ही उन्होंने कहा कि असमंजस और हड़बड़ी की वजह से जो प्रस्ताव गिरा है सरकार उस पर बाद में दुबारा वोटिंग करा ले।
दरअसल खाद्य सुरक्षा विधेयक पर विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों की ओर से लगभग 200 संशोधन प्रस्ताव रखे गए थे। इन पर एक-एक करके वोटिंग चल रही थी।
उसी बीच, थॉमस ने सरकार की ओर से एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया। सरकार की ओर से सदस्य लगातार वोटिंग के विरोध में मतदान कर रहे थे। इस दौरान आए सरकार के प्रस्ताव पर भी उन्होंने वोटिंग के विरोध में मतदान कर दिया।
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मतदान गिरते ही सत्ता पक्ष में हड़कंप मच गया। विपक्ष ने सरकार का प्रस्ताव गिरते ही आलोचना शुरू कर दी। इससे संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ नाराज हो गए और उन्होंने प्रस्ताव गिरने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया। इससे पक्ष और विपक्ष में वाद-विवाद बढ़ने लगा।
इस बीच, सुषमा स्वराज ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से अनुरोध किया कि चूंकि खाद्य सुरक्षा विधेयक पर संशोधनों की लिस्ट लंबी है, इसलिए वाद-विवाद में समय बर्बाद न कर आगे की कार्यवाही चलाई जाए।
साथ ही सरकार का जो संशोधन उनके ही सदस्यों की गलती के कारण गिर गया है, उस पर दुबारा वोटिंग करा ली जाए। सुषमा के इस सुझाव के बाद सदस्य शांत हो गए। दुबारा वोटिंग हुई और सरकार का संशोधन पास हो गया।
मानसून सत्र अब 6 सितंबर तक
संसद का मानसून सत्र अब 30 अगस्त के बदले छह सितंबर तक चलेगा। जरूरी विधेयकों और कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए सरकार ने पांच अतिरिक्त बैठकें बुलाने का फैसला किया है।
संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने सभी दलों से सहमति हासिल करने के बाद सत्र की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है।
सत्र के पहले ही दिन से हंगामे के कारण सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित नहीं करा पाई है। ऐसे में सरकार ने सत्र की अवधि बढ़ा कर लंबित कार्य निपटाने की योजना बनाई है।