सुषमा ने बताया स्टिंग से कैसे बचें सांसद
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 16वीं लोकसभा के लिए पहली बार चुनकर आए निर्वाचित सांसदों को सत्ता के गलियारे में घूम रहे धंधेबाजों से आगाह करते हुए सदन में सवाल पूछते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की नसीहत दी है।
सुषमा ने नए सांसदों को लोकसभा में हुए स्टिंग ऑपरेशन के बाद लोकसभा की गरिमा बचाने के लिए सांसदों की सदस्यता रद्द करने के फैसले की याद दिलाते हुए जनहित के सवाल उठाने को ही तरजीह देने का सुझाव दिया है।
16वीं लोकसभा में पहली लोकसभा के बाद रिकार्ड संख्या में चुन कर आए नए सांसदों के लिए हुई दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान सुषमा स्वराज ने राजधानी की सत्ता के गलियारों में घूमने वाले धंधेबाजों से आगाह किया।
स्टिंग ऑपरेशन से बचने का 'सुषमा-मंत्र'
सुषमा ने खासतौर पर संसद में सवाल पूछने के मामले में नए सांसदों को सावधान करते हुए कहा है कि इसमें की गई चूक से उनकी सदस्यता पर भी खतरे की तलवार लटक सकती है।
उन्होंने नए सांसदों को सीख देते हुए कहा कि यहां सत्ता के गलियारे में घूमने वाले धंधेबाज उन्हें अपनी जाल में फंसा सकते हैं। ये लोग चलते फिरते सांसदों को सवाल का कागज पकड़ा कर इसे संसद में पूछने के लिए प्रलोभन दे कर प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि नए सांसदों का दायित्व है कि वह सवाल पूछने से पहले इस बात का बारीकी से अध्ययन करे कि संबंधित सवाल किसी खास बिजनेस लॉबी, व्यापार हित या अन्य विवादों से तो नहीं जुड़ा। इनसे बचने के लिए हर सांसद को जनहित से जुड़े सवाल ही पूछने चाहिए।
सवाल पूछने पर 14वीं लोकसभा में हुए स्टिंग ऑपरेशन का परोक्ष जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने इस संबंध में लोकसभा द्वारा सदस्यों की सदस्यता खत्म करने संबंधी फैसले की याद दिलाते हुए कहा कि तब संसद ने बता दिया था कि वह अपनी गरिमा बचाने के लिए किस सीमा तक जा सकता है।
विशेषाधिकार जानने को इच्छुक सांसद
दिलचस्प तथ्य यह है कि बड़ी संख्या में पहली बार चुन कर आए सांसदों में से कई को अपने विशेषाधिकार का ज्ञान नहीं है। यही कारण है कि कार्यशाला में सर्वाधिक सवाल विशेषाधिकार के बारे में ही पूछे गए।
जब यह सिलसिला रुकता नहीं दिखा तो स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सांसदों को विशेषाधिकार से पहले अपनी भूमिका और दायित्व समझने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि विशेषाधिकार के बारे में जानकारी के लिए अलग कार्यक्रम कराया जाएगा। मगर इससे विशेषाधिकार की जानकारी से ज्यादा जरूरी सांसदों को अपनी भूमिका और दायित्व को समझना है।
इस दौरान कई सांसदों ने डेढ़ महीना बीतने के बावजूद सरकारी आवास आवंटित न होने, राज्य के भवनों और होटल के एक कमरे में गुजर करने का मामला उठाया। स्पीकर ने इसे हर नई लोकसभा गठित होने के शुरुआती कुछ महीने की समस्या बताया।