कठोर सरकार से होगा ओबामा का सामना: सुषमा
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मोदी सरकार को सख्त, सक्रिय और संवेदनशील करार देते हुए कहा है कि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का सामना एक कठोर सरकार से होगा।
अपने मंत्रालय के सौ दिन के कामकाज की उपलब्धियां गिनाते हुए अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया की तरह अन्य देशों खासकर अमेरिका से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में मदद हासिल करने के लिए परमाणु उत्तरदायित्व कानून में किसी भी तरह के संशोधन से साफ इंकार किया।
विदेश मंत्री ने दावा किया कि पहले सौ दिनों में उनके मंत्रालय ने अपने वादों और योजना के अनुरूप ही पड़ोसी देशों से संपर्क बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल की है।
पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह और ओबामा के बीच हुई मुलाकात और मोदी-ओबामा की संभावित मुलाकात में अंतर के संदर्भ में पूछे जाने पर सुषमा स्वराज ने कहा कि सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे तो उनका सामना एक कठोर सरकार से होगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार ने समय और परिस्थितियों के अनुरूप सख्त रवैया अपनाने से परहेज नहीं किया है।
मसलन जब अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी भारत आए तो उन्हें साफ बताया गया कि दोस्ती और जासूसी साथ-साथ नहीं चल सकती। इसी प्रकार शरीफ को भी आतंकवाद और दोस्ती साथ-साथ नहीं चलने का संदेश दिया गया।
20 को होगी भारत-बांग्लादेश वार्ता
सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत-बांग्लादेश के बीच विवादित तीस्ता जल बंटवारे और सीमाई विवाद समेत कई द्विपक्षीय मुद्दों पर 20 सितंबर को संयुक्त सलाहकार आयोग की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार तीस्ता समझौते पर आपसी सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
अगवा भारतीय सुरक्षित
इराक के मोसुल शहर से करीब चार महीने पहले अगुआ किए गए 40 भारतीय सुरक्षित हैं। हालांकि सुषमा ने साथ ही यह भी कहा कि इनसे सरकार फिलहाल सीधे संपर्क में नहीं है।
विदेश मंत्री ने अगवा भारतीयों की सकुशल रिहाई के प्रति उम्मीद जाहिर की और कहा कि पीछे के दरवाजे से इनके बारे में लगातार सूचना मिल रही है। उल्लेखनीय है कि ये अगवा भारतीय अरसे से आतंकी संगठन आईएस के कब्जे में हैं।
पाक को ठहराया जिम्मेदार
सुषमा ने विदेश सचिव स्तर की वार्ता टूटने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया, मगर दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से बहाल होने का संकेत देते हुए अमेरिका में मोदी-शरीफ मुलाकात की संभावना से इंकार भी नहीं किया।
उन्होंने मोदी की शरीफ से संभावित मुलाकात के संदर्भ में कहा कि यह तब की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। सुषमा ने कहा कि कूटनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता। इसमें हमेशा अल्प विराम होते हैं और लोग हमेशा आगे बढ़ते हैं।
चीन पर नहीं थी मोदी की टिप्पणी
चीन से प्रतिस्पर्धा और सहयोग के रिश्तों के बारे में बात करते हुए सुषमा ने साफ किया कि हाल ही में जापान दौरे के समय पीएम मोदी की विस्तारवादी टिप्पणी किसी देश को लक्ष्य करके नहीं थी।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पूर्व सुषमा ने कहा कि भारत बस यही चाहता है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में उसकी संवेदनशीलता को देखते हुए ठीक उसी तरह समझे और कद्र करे जैसा कि भारत का तिब्बत और ताइवान पर चीन की स्थिति को लेकर है।