‘गीता’ पर सुषमा के बयान पर महाभारत
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने संबंधी बयान पर महाभारत छिड़ गई है।
विपक्षी दलों के साथ ही राजग की सहयोगी पीएमके ने भी सख्त ऐतराज जताया है। इन दलों ने स्वराज के बयान को अनुचित करार देते हुए कहा है कि सरकार को सभी धर्मों के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए। हालांकि विदेश मंत्री का पक्ष लेते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि उनके बयान में कुछ भी गलत नहीं है।
सुषमा ने रविवार को कहा था कि भगवद् गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की केवल औपचारिकता बाकी है। उनके इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने तीखी आलोचना की है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सवाल किया कि बहु आस्था वाले देश में एक पवित्र किताब दूसरी की तुलना में ज्यादा पवित्र कैसे हो सकती है।
कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने उठाए सवाल
शशि थरूर ने कहा कि वह एक हिंदू हैं लेकिन उनके धर्म में केवल एक नहीं बल्कि कई धार्मिक पुस्तकें हैं। यदि आप गीता को चुनते हैं तो वेदों और उपनिषदों का क्या। वहीं पीएमके संस्थापक रामदौस ने कहा कि केंद्र सरकार पर गीता के बहाने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पीएम बनने के बाद उन्होंने सिर्फ भाषा और संस्कृति थोपी है, लेकिन कोई प्रशंसनीय काम नहीं किया।
द्रमुक प्रमुख करुणानिधि ने भी सरकार को धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की पैरवी कर स्वराज ने खुद के लिए मुसीबत पैदा कर ली है। भाकपा, आम आदमी पार्टी और जदयू ने भी सुषमा के बयान की कड़ी निंदा की है।