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नेपाल पर बोली सुषमा 'भारत ने नहीं की सीमा पर नाकेबंदी'

Mon, 07 Dec 2015 11:22 PM IST
Updated Mon, 07 Dec 2015 11:22 PM IST
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 Sushma bid on Nepal India did not  blockade border '

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्य सभा में भारत-नेपाल रिशतों पर हुई अल्पकालिक चर्चा के जवाब में यह स्पष्ट किया है कि भारत सरकार की ओर से नेपाल सीमाओं पर नाकेबंदी नहीं की गई है। बल्कि नेपाल में मधेसी आंदोलन की वजह से हालात बिगड़े हुए हैं। चूंकि नेपाल में आनन-फानन में 2007 के संविधान को पलटने की वजह से मधेसी नाराज हैं और उन्होंने इसलिए आंदोलन किया है।

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इससे वहां सहायता पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। और वहां की जनता को खामियाजा उठाना पड़ रहा है। सुषमा स्वराज ने कहा कि नेपाल ने बिना बहस के दो दिनों में संविधान संशोधन को पारित कर दिया गया। आनन-फानन में पारित संविधान में मधेसियों के अधिकारों के साथ न्याय नहीं हुआ है और इसी से मधेसी नाराज थे।
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उन्हें लगा कि ऐसे में उनके नए हित जुड़ने तो क्या पुराने अधिकार भी चले गए। इसलिए उन्होंने आंदोलन किया और सीमा पर नाकेबंदी कर दी है। उन्होंने कहा कि नेपाल की समस्या का हल राजनैतिक सहमति से निकलना चाहिए। नेपाल स्वायत्त देश है और हम उसकी स्वायत्ता का पूरा सम्मान करते हैं। भारत की ओर से नेपाल को प्रवचन नहीं सलाह दी जाती है। क्योंकि नेपाल आंदोलन के हिंसक होने का असर दोनों देशों के बीच होगा।
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नेपाल की मदद बड़े भाई की तरह

 Sushma bid on Nepal India did not  blockade border '

उन्होंने बताया कि जल्द ही संसदीय शिष्टमंडल नेपाल की यात्रा पर जा सकता है। साथ ही नेपाल में बिगड़े हालात के हफ्ते दिनों में सुधरने की संभावना जताई। ऐसा पिछले दिनों नेपाल के विदेश मंत्री कमल थापा से मुलाकात में हुई बातचीत और मधेसी नेताओं से हुई बातचीत के आधार पर उन्होंने व्यक्त किया। विदेश मंत्री ने कहा कि भूकंप त्रासदी के दौरान भारत ने नेपाल की मदद बड़े भाई की तरह की है।

राज्सभा में नेपाल के हालात पर हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि भारत की ओर से सहायता लेकर गए 11206 ट्रक नाके पर खड़े हैं। यह मधेसी आंदोलन की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे। वहीं इसे पीछे भी नहीं लिया जा रहा। हालांकि पेट्रोल और दवा लेकर गए ट्रको को दूसरे रास्तों से भेजने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने बताया कि रविवार तक 864 ट्रक गये हैं। जबकि 450 ट्रक ही अन्य नाको से जाते हैं। नेपाल से दवाओं की सूची मांगी गई थी और 24 घंटे में उपलब्ध कराने को आश्वस्त किया गया था। यह भी कहा गया कि अगर कंपनियों से सीधे दवा ले लिया जाए तो भारत की ओर से इसका भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन आज तक नेपाल से सूची नहीं आई।

एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं

 Sushma bid on Nepal India did not  blockade border '

सुषमा ने कहा कि दूतावास और विदेश मंत्रालय एक साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने सरकार पर लग रहे आरोप की भरपूर निंदा की। साथ ही यह भी कह डाला कि सरकार के हाथी के दांत खाने और दिखाने के अलग-अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल संबंध सदियों पुराना है।

जब यह कहा जाता है कि हालात इससे ज्यादा बुरी कभी नहीं हुई थी जो मुझे बड़ा अफसोस होता है। उन्होंने मोदी सरकार के प्रयास और पक्ष को आंकड़ों में उजागर करते हुए बताया कि 26 मई 2015 से पहले पिछले 17 सालों में कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल नहीं गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल अगस्त में नेपाल की यात्रा की।

जबकि 23 सालों में कोई भी भारतीय विदेश मंत्री संयुक्त समिति की बैठक में शामिल नहीं हुआ था। वे इन वर्षो में पहली विदेश मंत्री हैं जिन्होंने नेपाल की यात्रा की है। ऐसे में यह सदन के विवेक पर है कि नेपाल के साथ रिश्ते कितने अच्छे हैं? और हमने क्या किया है?

सुझावों की तारीफ

 Sushma bid on Nepal India did not  blockade border '

उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के सरकार पर लगाए गए आरोपों के जवाब में यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार में सवा साल (मार्च 1989 से जून 1990) तक नाकेबंदी रही थी। इसलिए यह नहीं कहा जाना चाहिए दोनों देशों के बीच इससे खराब स्थिति पहले कभी नहीं थी।

सुषमा ने कहा कि भारत कभी भी किसी स्वतंत्र देश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। लेकिन वह मदद के लिए हमेशा तैयार है। जब नेपाल में भूकंप आया तो महज छह घंटे में ही भारत मदद लेकर पहुंचा। इस दौरान भारत ने बिग ब्रदर नहीं बल्कि एल्डर ब्रदर(बड़े भाई) की भूमिका निभाई है।

भारत के सहयोग को उजागर करते हुए बताया कि इंटरनेशनल डोनर कांफ्रेस में नेपाल को एक बिलियन डॉलर की मदद की घोषणा की गई है। जबकि पहले से ही भारत एक बिलियन डॉलर दे चुका है। विदेश मंत्री ने कहा कि अपनी वाहवाही को हायहाय में बदलने की मूर्खता कोई नहीं कर सकता।

विदेश मंत्री ने अल्पकालिक चर्चा में मधेसियों की पीड़ा बेहतर तरीके से रखने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कर्ण सिंह समेत कई सदस्यों के सुझावों की तारीफ की। मगर मणिशंकर अय्यर और जदयू के पवन वर्मा के सरकार की आलोचना को लेकर कही गई बातों को तथ्यहीन बताते हुए सदन के पटल पर खारिज कर दिया। साथ ही सुषमा ने कहा कि सदन की भावना के अनुरुप ही सरकार की भी भावना है और हम संसदीय शिष्टमंडल नेपाल भेजने के लिए तैयार हैं।

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