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सूर्यनेल्ली गैंगरेप: हाईकोर्ट के फैसले से सुप्रीम कोर्ट असहमत
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jan 2013 08:41 PM IST
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1996 के सूर्यनेल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले के पैंतीस अभियुक्तों को बरी करने के केरल हाईकोर्ट के फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को असहमति जतायी और मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया। हाईकोर्ट ने एक को छोड़कर बाकी 35 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। वर्ष 1996 में हुई इस वारदात में 40 दिन के दौरान 42 व्यक्तियों ने कथित रूप से एक नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म किया था।
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जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने 35 अभियुक्तों को बरी करने के निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर यह फैसला दिया। पीठ ने केरल हाईकोर्ट से कहा कि वह अभियुक्तों की अपील पर दोबारा सुनवाई करे।
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35 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने सितंबर 2000 में दोषी ठहराया था। लेकिन हाईकोर्ट ने एक के अलावा बाकी सभी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में सिर्फ एक व्यक्ति को देह व्यापार से संबंधित अपराध का दोषी ठहराया था। उसे पांच साल की कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनायी थी।
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केरल के इदुक्की जिले के सूर्यनेल्ली इलाके की इस नाबालिग लड़की का जनवरी, 1996 में अपहरण करके कई स्थानों पर ले जाया गया । इस दौरान उसके साथ 42 व्यक्तियों ने कथित रूप से दुष्कर्म किया था। सुप्रीम कोर्ट ने तीन जनवरी को इन अभियुक्तों को बरी करने के निर्णय के खिलाफ दायर अपील पर प्राथमिकता के आधार पर तीन हफ्ते के अंदर सुनवाई करने का निश्चय किया था।
मां-बाप ने किया फैसले का स्वागत
सूर्यनेल्ली गैंगरेप मामले में 35 आरोपियों को बरी करने के हाईकोर्ट के आदेश को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द करने के फैसले का पीड़ित लड़की के माता-पिता, राजनेताओं और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। दूसरी ओर राज्य के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करेगा।
इदुक्की जिले के रहने वाले पीड़ित लड़की के पिता ने कहा कि हम भगवान को धन्यवाद देते हैं। न्याय के लिए हमारी प्रार्थनाएं सुन ली गईं हैं। लड़की की मां ने कहा कि लंबे समय तक न्याय के लिए लड़ने के दौरान जिन लोगों ने सहायता की, मैं और मेरे पति उनके आभारी हैं।
इस मामले को आगे ले जाने के लिए पीड़ित लड़की के परिजनों की मदद करने वाले सीपीआई (एम) नेता व पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने कहा कि उन्हें खुशी है कि देर से ही सही, पर न्याय मिला।