'प्रभु कृपा' से ट्रेन में ही मिलेगा टुंडे कबाब का मजा
टुंडे के कबाब का स्वाद लेने के लिए लखनऊ के अमीनाबाद नहीं जाना पड़ेगा। रेलयात्री लखनऊ मेल में भी इस लाजवाब डिश का स्वाद चख सकेंगे। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की रेलगाड़ियों में लिट्टी चोखा उपलब्ध होगा तथा पंजाब जाने वाली ट्रेनों में मक्के की रोटी के साथ सरसों का साग परोसा जाएगा।
इसी तरह कालका-शिमला की छुक-छुक गाड़ी के यात्री हिमाचली व्यंजन का लुत्फ उठा सकेंगे, जबकि देहरादून के यात्रियों को उत्तराखंड के व्यंजनों से माटी की खुशबू महसूस हो सकेगी। कुल्हड़ की वापसी लालू युग की याद दिलाएगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कुल्हड़ में चाय परोसने के विकल्प की व्यवहारिकता का पता लगाने की बात कही है।
रेल बजट में इस बार ट्रेनों में स्थानीय व्यंजनों को परोसने का एलान किया गया है। यात्रियों को रेलवे कैंटीनों की स्थापित खानपान व्यवस्था से निजात मिलेगी और वैकल्पिक भोजन का फायदा मिल सकेगा। प्रभु के बजट में यात्रियों की सेहत का ध्यान रखा गया है। आम तौर पर यात्रियों को यात्रा के दौरान खाने-पीने की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। लिहाजा रेल बजट में गुणवत्तापूर्ण भोजन का वादा किया गया है।
वितरण सेवा में सुधार को प्राथमिकता
बजट में भोजन तैयार करने और इसके वितरण की सेवा में सुधार को प्राथमिकता दी
गई है। ई खानपान सेवा को ए वन और ए श्रेणी के 408 स्टेशनों पर उपलब्ध
कराने का वादा बजट में शुमार है। अब तक यह सुविधा सिर्फ 45 स्टेशनों पर थी।
ताजा
और स्वच्छ भोजन सुनिश्चित करने के लिए आईआरसीटीसी द्वारा संचालित मशीनीकृत
और उन्नत 10 नए बेस किचन स्थापित होंगे। गुणवत्ता में सुधार के लिए
अनिवार्य रूप से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। अब एक स्टाल पर एक ही तरह
का सामान नहीं बल्कि तरह-तरह की वस्तुएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इस तरह दूध और
इसके अन्य उत्पाद तथा दवाएं हर स्टाल पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी। खानपान की
इकाइयों के आवंटन में एससी-एसटी, महिलाओं, ओबीसी और दिव्यांगों के लिए
आरक्षण होगा। हर कोटे में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत उप कोटा भी उपलब्ध
होगा। स्थानीय लोगों को स्टेशनों पर वाणिज्यिक लाइसेंस में प्राथमिकता
मिलेगी।