फांसी से पहले ही कोली हुआ खामोश
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निठारी के नर पिशाच सुरेंद्र कोली को डेथ वारंट के हिसाब से 7 से 12 सितंबर के बीच कभी भी फांसी दी जा सकती है। शनिवार को चर्चा रही कि उसे रविवार या सोमवार की सुबह फांसी दी जाएगी। हालांकि, अफसर इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।
वे इतना जरूर कह रहे हैं कि नैनी जेल से फंदा और कुंडा आ गया है। हमारी तैयारियां पूरी हैं। कोली को कभी भी फांसी हो सकती है। कोली की फांसी का काउंट-डाउन भी शनिवार से शुरू कर दिया गया।
विशेष वाहक के जरिए इलाहाबाद की नैनी जेल से फंदा और कुंडा आने के बाद जल्लाद पवन ने फांसीघर का निरीक्षण किया। उसने नट-बोल्ट कसते हुए तख्ते सेट किए। उधर, कोली के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी।
जेल प्रशासन को कोली के परिजनों का इंतजार
जेल अफसरों के अनुसार कोली सामान्य व्यवहार कर रहा है। डासना जेल से जो कपड़े पहनकर आया था, आज उन्हें बदला। कुछ पूछने पर हां या ना में जवाब देता है। किसी से वह बात करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। इन दो दिनों में उसने कोई डिमांड नहीं की है।
परिजनों का इंतजार
जेल प्रशासन को कोली के परिजनों का इंतजार है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी का कहना है कि कोली ने हमसे परिजनों को बुलाने के लिए नहीं कहा है। लेकिन हम चाहते हैं कि वे आएं।
इसलिए कोली को मेरठ शिफ्ट करने से पहले ही डासना जेल से परिजनों को इस बारे में सूचित कर दिया गया। कोली को परिजनों की अनुपस्थिति में फांसी दी जाएगी तो क्या होगा? इस पर उन्होंने कहा कि फिर किसी स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से उसके शव का अंतिम संस्कार कराया जाएगा।