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एक सप्ताह के लिए सुरेंद्र कोली बना VIP

Wed, 10 Sep 2014 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 10 Sep 2014 08:58 AM IST
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surendra koli vip for one week

सुरेंद्र कोली से लेकर जेल और जिला प्रशासन 15 सितंबर की रात 12 बजे तक निश्चिंत हो चुका है। अब आगे की कोई भी कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेशानुसार ही होगी। हालांकि इस अवधि में कोली वीआईपी ही रहेगा। उसकी सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

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सीबीआई कोर्ट के डेथ वारंट के क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने रविवार आधी रात को एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। मंगलवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने बताया कि 15 सितंबर के बाद जैसा आदेश आएगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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कोली को फांसी टलने की उम्मीद

जेल सूत्रों की मानें तो कोली निश्चिंत है कि आगे भी उसकी फांसी टल जाएगी। जेल अफसर भले ही कह रहे हों कि कोली किसी से बातें नहीं कर रहा। लेकिन जेल में चर्चा है कि कोली मानकर चल रहा है कि उसकी फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदल जाएगी।

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फांसी टलने के बाद और शांत हुआ कोली

surendra koli vip for one week

निठारी कांड में मौत की सजा पाया सुरेंद्र कोली जेल में बैठकर अपने बचाव की उधेड़बुन में लगा है। लेकिन चुप्पी साधे हुए है। फांसी टलने के बाद मंगलवार को जेल अधीक्षक उससे मिलने बैरक में पहुंचे। तो उसने केवल हां-हूं में ही जवाब दिया।

मंगलवार सुबह जेल में गिनती के बाद जब वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी राउंड लगाते हुए कोली की बैरक में पहुंचे तो वह बिस्तर पर लेटा हुआ था। सफेद बनियान और लोअर पहने कोली उन्हें देख उठ खड़ा हुआ। अधीक्षक ने पूछा कैसे हो। तो उसने गर्दन हिलाकर जवाब दिया। पूछा कि कोई दिक्कत तो नहीं या कुछ चाहिए, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और नीचे देखने लगा। करीब पांच मिनट तक वहां सन्नाटा रहा। कोली कुछ नहीं बोला और अधीक्षक उसका चेहरा पढ़ते रहे। उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो वे लौट गए। जेल अधीक्षक ने बताया कि सोमवार को जब उसे फांसी टलने की सूचना दी गई तो उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान देखी गई थी। आज मंगलवार को उसने और ज्यादा खामोशी की चादर ओढ़ ली।

दोनों तारीख एक संयोग ही

दो सितंबर को गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई थी। डेथ वारंट जारी करते हुए उसे सात से 12 सितंबर के बीच फांसी देने के आदेश दिए थे। इसी तारीख को ही सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले में निर्णय दिया था कि फांसी की सजा से दंडित आरोपी की सुनवाई खुली अदालत में की जानी चाहिए। वरिष्ठ जेल अधीक्षक के अनुसार इसी आधार पर कोली से उसके अधिवक्ता डासना जेल में मिले थे और उसे निश्चिंत किया था कि वे पूरी कोशिश करेंगे कि उसकी फांसी की सजा फिलहाल टलवा दी जाए। जिसके बाद कोली निश्चित होकर डासना से मेरठ जेल पहुंचा था।

बिना परिजनों के पैरवी

surendra koli vip for one week

जेल प्रशासन का कहना है कि छह दिन बीत चुके हैं। लेकिन कोली से मिलने न तो कोई परिजन पहुंचा और न कोई वकील। डासना जेल से भी पता कराया गया तो पिछले आठ साल में उसके वकीलों के अलावा कोई परिजन या बाहरी व्यक्ति नहीं मिला। मेरठ जेल की बैरक में भी वह पूरे दिन पता नहीं किस उधेड़बुन में लगा रहता है। किसी से खुद बात करना तो दूर, कुछ पूछने पर जवाब भी संक्षिप्त देता है।

पूजा पाठ बहुत करता है
कोली अपनी बैरक में पूजा पाठ बहुत करता है। सुबह समय से जागना और समय से सोना उसकी दिनचर्या में शामिल है। हालांकि रविवार की रात उसके रुटीन में थोड़ी तब्दीली मिली। कोली देवी का भक्त बताया जाता है।

नहीं किया कोई ऐलान

वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने मंगलवार को बताया कि कोली ने फांसी टलने का पूर्व में कोई ऐलानिया दावा नहीं किया था। उनके अनुसार जेलर आरके वर्मा से इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने भी ऐसी किसी जानकारी से इंकार किया। जेलर के अनुसार कोली ने उनसे ऐसी कोई बात नहीं कही थी। बल्कि वह तो किसी से भी बात करने से झिझकता है। हालांकि हमारा यही अंदाजा था कि उसे कहीं न कहीं कोई विश्वास है कि उसकी फांसी टल सकती है। इसलिए वह निश्चिंत दिख रहा है।

कुंती देवी की बेटे से मिलने की हसरत अधूरी

surendra koli vip for one week

फांसी से पहले बेटे सुरेंद्र कोली से मिलने की मां कुंती देवी की हसरत पूरी नहीं हो सकी। निठारी कांड में फांसी की सजा का इंतजार कर रहे सुरेंद्र कोली की मां कुंती को मेरठ ले जाकर बेटे से मिलाने के लिए समाजसेवी राष्ट्रीय लोक दल यूपी के महासचिव संजय कश्यप सोमवार को मंगरुखाल पहुंचे तो मगर प्रधान समेत कोई भी ग्रामीण कुंती देवी को लेकर संजय के साथ मेरठ जाने को तैयार नहीं हुआ। इससे निराश संजय भी मंगलवार को वापस मुजफ्फरनगर लौट गए।

मुजफ्फरनगर निवासी संजय कश्यप सोमवार को एक अन्य साथी के साथ मंगरुखाल पहुंचे थे। वह निठारी कांड में फांसी की सजा दिए जाने से पहले कुंती देवी की मुलाकात बेटे सुरेंद्र से करवाना चाहते थे। कश्यप और उनका साथी रात में गांव में ही रुके। उन्होंने ग्राम प्रधान से स्वयं अथवा किसी अन्य ग्रामीण को कुंती देवी के साथ मेरठ चलने का आग्रह किया, ताकि जेल में सुरेंद्र से मां कुंती देवी की मुलाकात हो सके, लेकिन उनके साथ मेरठ चलने के लिए प्रधान आनंद राम समेत कोई भी ग्रामीण तैयार नहीं हुआ।

संजय कश्यप ने बताया कि वह फांसी पर लटकाने से पहले सुरेंद्र से मां की मुलाकात करवाना चाहते थे, लेकिन कोई भी ग्रामीण के कुंती के साथ चलने को तैयार नहीं है। मां बेटे की मुलाकात नहीं करवा पाने का उन्हें मलाल रहेगा।

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