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सुप्रीम कोर्ट का सीबीआई को नोटिस

Fri, 29 Nov 2013 07:37 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 29 Nov 2013 07:37 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में पांच साल कैद की सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताते हुए सीबीआई से जवाब तलब किया है।

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चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने चारा घोटाले में जांच एजेंसी को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई के लिए 13 दिसंबर की तारीख तय की है।
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लालू की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने कहा कि राजद प्रमुख इस मामले में दोषी ठहराए गए 44 आरोपियों में से एक हैं। लेकिन वही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी जमानत याचिका को निचली अदालत और हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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उन्होंने तर्क दिया कि मामले में अब तक 37 दोषियों को जमानत मिल चुकी है और किसी की भी जमानत याचिका खारिज नहीं की गई है।

जेठमलानी ने यह भी कहा कि दोषी करार दिए जाने के खिलाफ लालू की अपील को निपटाने में झारखंड हाईकोर्ट को लंबा समय लगेगा। इसके बावजूद जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

संसद सदस्यता खो चुके लालू ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी है।

राजद प्रमुख, बिहार के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र तथा 43 अन्य को सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा कोषागार से फर्जी तरीके से 37.7 करोड़ रुपये निकालने के मामले में गत 30 सितंबर को दोषी ठहराया था।

यह राशि लालू के नेतृत्व वाली राजद सरकार के शासनकाल के दौरान निकाली गई थी।

सीबीआई अदालत ने दोषियों को गत 3 अक्तूबर को अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई थी। लालू ने कहा है कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया है।


जमानत प्रदान करने के मामले में याचिकाकर्ता के साथ भिन्न व्यवहार किया गया है, जबकि कुछ सह आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है।

जमानत का आग्रह करते हुए लालू ने कहा कि वह मुकदमे के दौरान पहले ही करीब 10 माह और दोषी करार दिए जाने के बाद लगभग दो माह जेल में रह चुके हैं।

उनका कहना है कि जमानत मिलने के बाद उनके लिए देश से फरार होने का कोई अवसर नहीं है। याचिका में कहा गया है कि लालू बिहार राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय रेल मंत्री थे और एक राजनीतिक दल के नेता भी हैं।

मौजूदा मामले में खुद को दोषी करार दिए जाने तक वह संसद सदस्य थे। ऐसे में उनके देश से फरार होने की संभावना नहीं है।

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