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समान नागरिक संहिता याचिका पर सुनवाई नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट

Tue, 08 Dec 2015 02:14 AM IST
Updated Tue, 08 Dec 2015 02:14 AM IST
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Supreme Court  will not hear petition on Uniform Civil Code

 देश में समान नागरिक संहिता(यूनिफार्म सिविल कोड) लागू करने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अदालत संसद को कोई विशिष्ट कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती है। यह काम कानून निर्माताओं का काम है न कि अदालत का।

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि समान नागरिक संहिता बनाने के लिए शीर्ष अदालत की टिप्पणी उम्मीद आधारित हो सकती है लेकिन इस संबंध में निर्देश सरकार ही जारी कर सकती है।
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पीठ ने यह भी कहा कि उस व्यक्ति को अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए जिसकेसाथ पर्सनल लॉ केकारण उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो या भेदभाव हुआ हो। कोई दूसरे समुदाय या धर्म  का व्यक्ति समान संहिता की गुहार नहीं कर सकता। पीठ ने कहा कि इस मसले पर कानून स्पष्ट है। हमारा मानना है कि इस तरह का निर्णय संसद को लेना चाहिए।

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यह विधायिका का काम है

Supreme Court  will not hear petition on Uniform Civil Code

याचिका भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम ने पीठ से कहा कि ऐसे कई उदाहरण है जब शीर्ष अदालत ने सरकार को समान नागरिक संहिता बनाने के लिए कहा है। लिहाजा अब समय आ गया गया कि जब अदालत को इस मसले पर सरकार को निर्देश देना चाहिए।

पीठ ने वरिष्ठ वकील से कहा कि वर्ष 1993 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इसी तरह की जनहित याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि यह काम विधायिका का है। पीठ ने वरिष्ठ वकील से कहा कि क्या आप बता सकते हैं कि जब 1993 केआदेश को दरकिनार किया गया हो।

पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ की वजह से प्रताड़ित हुई है,  ऐसे में अगर वह महिला अदालत के आती तो हम इस पर विचार कर सकते थे। पीठ ने यह भी कहा कि अब तक उस समुदाय केलोगों ने अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?

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