फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   supreme court will hearing on change in it law

आईटी कानून में बदलाव पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Fri, 30 Nov 2012 12:57 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 30 Nov 2012 12:57 AM IST
विज्ञापन
supreme court will hearing on change in it law

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आजादी का दायरा क्या हो, सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को निपटाने की दिशा में सक्रिय हो गया है। फेसबुक पर कथित आपत्तिजनक संदेश लिखने के आरोप में बीते कुछ महीनों में हुई कई गिरफ्तारियों से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून में बदलाव की मांग के निपटारे में अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती की मदद मांगी है।

विज्ञापन


याचिका में इस कानून की धारा 66 ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली की छात्रा श्रेया सिंघल की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल को अदालत की मदद के लिए कहा है। लेकिन पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ‘आपत्तिजनक’ संदेश लिखने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश सरकार को जारी करने से इंकार कर दिया। अदालत इस याचिका पर शुक्रवार को अगली सुनवाई करेगी। हाल ही में सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ‘आपत्तिजनक’ संदेश लिखने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। याचिका में इसे कानून का दुरुपयोग बताया गया है।
विज्ञापन


चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने इससे पहले सुबह श्रेया की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त करते हुए उनके अधिवक्ता को दोपहर में अदालत में पेश होने को कहा था। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि हाल की घटनाओं के संदर्भ में अदालत इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेने पर विचार कर रही थी। न्यायाधीशों ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि अभी तक ‘सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000’ के इस प्रावधान (66 ए) को किसी ने चुनौती क्यों नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्रेया ने दलील दी है कि इस कानून की धारा 66 ए की शब्द रचना अस्पष्ट है और यह उद्देश्य का मानक निर्धारण करने में अक्षम है। इस वजह से इसका दुरुपयोग हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के संबंध में आपराधिक कानून पर अमल से पहले इसके लिए न्यायिक मंजूरी की अनिवार्यता के बगैर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed