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सुप्रीम कोर्ट करेगी फैसला, सेना के मुस्लिम जवान दाढ़ी रखें या नहीं?

Thu, 26 Nov 2015 06:25 AM IST
Updated Thu, 26 Nov 2015 06:25 AM IST
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Supreme court will decide on muslim military personnel's beard

क्या सेना और पुलिस में मुस्लिम जवानों को लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत मिलेगी और क्या केंद्र में काबिज मोदी सरकार इसकी अनुमति देगी। करीब सात साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट में उठे इस मसले पर अब मोदी सरकार को अपना पक्ष रखना है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने लंबी दाढ़ी रखने को इस्लाम धर्म का मूल हिस्सा होने पर विचार करने के बदले कानूनी लड़ाई लड़ना बेहतर समझा था।

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस मसले को लेकर दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। एक मायने में यह मसला एनडीए सरकार पर छोड़ दिया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सिखों को लंबे बाल और पगड़ी रखने की इजाजत है तो मुस्लिम जवानों को लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
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लंबी दाढ़ी रखने के कारण वायुसेना से निकाले गए अंसारी आफताब अहमद द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि दाढ़ी रखना धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का हिस्सा है। भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2008 में एयर हेड क्वार्टर पॉलिसी का हवाला देते हुए अहमद को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। वायुसेना का कहना था कि वायुसेना अधिनियम, 1950 की धारा-22 के तहत लंबी दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं है।

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सेना में दाढ़ी रखने पर है पाबंदी

Supreme court will decide on muslim military personnel's beard

आफताब की ओर वकील इरशाद हनीफ ने सोमवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका पर जल्द सुनवाई की अपील की लेकिन पीठ ने याचिका ठुकरा दी थी। हनीफ ने याचिका पर अंतिम बहस शुरू करने की अपील की थी। उनका कहना था कि लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद बहस शुरू नहीं हो पाई है। अदालत के आदेश से ही उनके मुवक्किल को पुन:बहाल किया जा सकता है।  याचिका उन मुस्लिम जवानों द्वारा दाखिल की गई है जिन्हें या तो नौकरी से हाथ धोना पड़ा है या जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है।

आफताब को वायुसेना ने तब नौकरी से निकाला था जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2008 में इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया था। उसी साल वायुसेना के एक अन्य जवान और महाराष्ट्र के एक पुलिसकर्मी ने भी इस मसले को लेकर याचिका दाखिल की थी। जवाब में वायुसेना ने अदालत को बताया था कि उनके यहां कोई भी मुस्लिम जवान लंबी दाढ़ी नहीं रखता। इस्लाम धर्म में लंबी दाढ़ी रखने को वैश्विक मान्यता नहीं है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता था कि मुस्लिमों में दाढ़ी काटने पर पाबंदी है।

वर्ष 2008 में ही तत्कालीन रक्षा मंत्री ने कहा था कि मंत्रालय सेना के तीनों अंगों को निर्देश जारी करने जा रही है कि लंबी दाढ़ी रखने वाले मुस्लिम जवानों या अधिकारियों पर कोई कार्रवाई न की जाए लेकिन अगले वर्ष सरकार ने कहा कि वह इस मसले पर फिर से विचार करेगी। लेकिन कुछ महीने बाद सरकार ने इस मसले पर कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय ले लिया। इसके बाद अदालत ने इन याचिकाओं को अंतिम बहस के लिए रख लिया लेकिन इतने सालों बाद भी अंतिम बहस शुरू नहीं हो पाई है। सात वर्ष पूर्व वायुसेना से निकाले गए अफताब फिलहाल छोटा-मोटा काम कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।

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