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'जघन्यतम अपराधों के लिए मौत की ही सजा मिले'

Sat, 28 Sep 2013 12:06 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Sat, 28 Sep 2013 12:06 AM IST
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supreme court  wants law for life imprisonment without remission

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर कर रख देने वाले अपराधों को जघन्यतम श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

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इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों को मौत की सजा ही मिलनी चाहिए। लेकिन इसने सरकार से बगैर किसी हेरफेर या छूट के आजीवन कारावास का भी प्रावधान करने को कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल की एक बच्ची का बलात्कार और फिर उसकी हत्या के एक मुकदमे में यह टिप्पणी की।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से दोषी के आजीवन कारावास को मौत की सजा में बदलने की मांग की गई थी। मामला नौ साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था।

इस पर अदालत ने कहा कि जिन मामलों में आजीवन कारावास को मौत की सजा में बदलने की मांग की जा रही है, उन्हें उचित प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सीके प्रसाद और जस्टिस कुरियन जोसफ की बेंच ने कहा समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर कर रख देने वाले अपराधों को जघन्यतम माना जाना चाहिए और इसी श्रेणी के मुताबिक अपराधियों को सजा भी मिलनी चाहिए।
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हमारा मानना है कि बेहतर होगा अगर सरकार आईपीसी की धारा 53 में संशोधन कर सजा की एक और श्रेणी बहाल करे। यह श्रेणी बगैर किसी हेरफेर या छूट के आजीवन कारावास की होनी चाहिए।

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