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कोलगेट पर सरकार और सीबीआई से जवाब तलब

Tue, 20 Nov 2012 12:27 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Tue, 20 Nov 2012 12:27 AM IST
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supreme court want explanation to government and cbi

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितता के सिलसिले में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन गोपालस्वामी, पूर्व नौसेनाध्यक्ष एल रामदास और पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम सहित कई पूर्व नौकरशाहों की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये नोटिस जारी किए।

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याचिका में कथित अनियमितता की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही विभिन्न निजी कंपनियों को नियमों का उल्लंघन कर आवंटित किए गए कोल ब्लॉक रद्द करने की मांग भी याचिका में की गई है। जस्टिस आरएम लोढ़ा और जस्टिस एआर दवे की पीठ ने याचिका पर न्यायिक समीक्षा का दायरा बढ़ाते हुए सारे प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित करने और विभिन्न कंपनियों को 194 कोयला ब्लॉकों के आवंटन रद्द करने के सवाल पर जवाब तलब किया। कोर्ट ने हालांकि इन लाइसेंस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोल ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं पर व्यापक जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई को 8 हफ्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी।
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इससे पहले याचिका में कहा गया कि कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई की जांच पर्याप्त नहीं है। याचिका में कहा गया है कि जांच की जटिलता और इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय सहित सरकार में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की संलिप्तता की संभावना के मद्देनजर मामले की सही तरीके से जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करने की आवश्यकता है। पूर्व नौकरशाहों और गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की जनहित याचिका में 1993 के बाद से विभिन्न निजी कंपनियों को आवंटित सभी कोयला ब्लॉक के लाइसेंस रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
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पहली बार न्यायिक समीक्षा के दायरे में आया मामला
कोयला ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मामला 14 सितंबर को पहली बार न्यायिक समीक्षा के दायरे में आया था। न्यायालय ने 14 सितंबर को वकील मनोहर लाल शर्मा की एक याचिका पर केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या 2004 से 2011 के दौरान कोयला ब्लॉक आवंटन में दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया था।


कोयला मूल्य निर्धारण पर रुख स्पष्ट करेगी सरकार
सरकार कोयले के मूल्य निर्धारण के मुद्दे पर जल्दी ही स्पष्ट रुख के साथ सामने आ सकती है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस बारे में कोयला और विद्युत मंत्रालय गंभीरता से विचार कर रहे हैं। संभावना है कि सरकार पखवाडे़ भर के अंदर इस मुद्दे पर स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ सामने आएगी। कोयला सचिव एस के श्रीवास्तव ने भी सोमवार को यहां कहा कि कोयले के मूल्य निर्धारण के मानदंडों पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। श्रीवास्तव ने दो दिवसीय कोयला सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए 12 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत इस क्षेत्र में आठ प्रतिशत विकास दर हासिल करने की उम्मीद भी जताई। सूत्रों के अनुसार देश में ऊर्जा की जरूरतों का 81 प्रतिशत हिस्सा कोयले से ही पूरा होता है। बेहतर होगा कि पनबिजली और परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देकर विद्युत उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भरता को कम किया जाए।

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