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SC में मानव संसाधन मंत्रालय की खिंचाई

Tue, 16 Sep 2014 08:47 AM IST
Updated Tue, 16 Sep 2014 08:47 AM IST
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Supreme Court targets on HRD ministry.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कामों में बेवजह के हस्तक्षेप पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाते हुए हर जगह टांग नहीं अड़ाने को कहा है।

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सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि हम देख रहे हैं कि मंत्रालय बेवजह हस्तक्षेप कर रहा है। यह पूरी तरह से अनुचित है, मंत्रालय अपने फैसले आयोग पर थोप नहीं सकता।
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चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंत्रालय की यूजीसी की स्वायत्तता के आड़े आने पर कड़ी निंदा की। आयोग एक विधायी निकाय है, जो देश के शैक्षिक विश्वविद्यालयों के मानकों को बनाए रखने, समन्वय स्थापित करने के साथ निर्णय लेता है।
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पीठ ने कहा कि हम देख रहे हैं कि मंत्रालय की ओर से बेवजह हस्तक्षेप किया जा रहा है। आप (मंत्रालय) यूजीसी पर कोई निर्णय थोप नहीं सकते क्योंकि आयोग एक स्वायत्त निकाय है और वैसे कार्य करने के लिए छोड़ दें, जैसा वह करना चाहे।

अदालत ने कहा कि यदि मंत्रालय हर स्तर पर नियंत्रण रखेगा तो एक अलग निकाय का क्या मतलब रह जाएगा। पीठ में जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रोहिंगटन नरीमन शामिल है।

बेवजह के हस्तक्षेप पर फटकार

Supreme Court targets on HRD ministry.

सर्वोच्च अदालत ने मंत्रालय से कहा कि अपनी टांग हर जगह मत अड़ाओ। हर जगह इसकी जरूरत नहीं है। यूजीसी को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और मंत्रालय की ओर से अनुचित दखल उचित नहीं है।

पीठ ने यह टिप्पणी सिंबोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एआईयू) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। एआईयू ने हैदराबाद में ऑफ कैंपस सेंटर बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दिए जाने के फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है।

दरअसल यूजीसी ने 22 जुलाई को मंत्रालय की डीम्ड यूनिवर्सिटी नीति के मुताबिक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने की सिफारिश करने का निर्णय लिया था। हालांकि पीठ ने इस पर कहा कि यूजीसी के अधिवक्ता ने यह खुलासा किया है कि आयोग ने अंतिम निर्णय मंत्रालय के सचिव की ओर से भेजी गई टिप्पणियों के आधार पर किया था।

आखिर मंत्रालय यूजीसी के निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में क्यों शामिल हुई। आयोग को स्वतंत्र रूप से अपना दिमाग इस्तेमाल क्यों नहीं करने दिया गया। पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल रंजीत सिन्हा ने इंगित किया कि यूजीसी पैनल में मंत्रालय की ओर से भी एक सदस्य है और अंतिम फैसला मंत्रालय ही लेता है।

इस पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आप एक सदस्य या सक्रिय सदस्य हो सकते हैं लेकिन आप अपने फैसले को थोप नहीं सकते। पीठ ने यूजीसी के 22 जुलाई के सिफारिश नहीं करने के निर्णय को रद्द करते हुए एसआईयू के आवेदन पर नए सिरे से तीन सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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