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सुप्रीम कोर्ट ने रोकी भुल्लर की फांसी

Fri, 31 Jan 2014 03:49 PM IST
Updated Fri, 31 Jan 2014 03:49 PM IST
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supreme court stays execution of bhullar

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले के तहत शुक्रवार को खालिस्तानी आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी।

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कोर्ट ने 2002 में भुल्लर को 1993 के दिल्ली बम ब्लास्ट का दोषी मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई थी। तभी से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

गौरतलब है कि भुल्लर की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के लिए याचिका दायर कर रखी है।

मानसिक बीमारी के चलते रोकी फांसी

supreme court stays execution of bhullar

सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की मानसिक बीमारी को देखते हुए उसकी फांसी पर रोक लगाई है। इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर भुल्लर की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है।

कोर्ट ने भुल्लर की फांसी की सजा के खिलाफ दायर याचिका के मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस भी जारी किया है।

शाहदरा अस्पताल से भी कोर्ट ने भुल्लर की मेडिकल रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

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बिट्टा को बनाया गया था निशाना

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दिल्ली बम ब्लास्ट में उस समय के युवा कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदर जीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाया गया था।

ब्लास्ट में बिट्टा को गंभीर चोटें आई थी। लेकिन उनके 9 सुरक्षा गार्ड इस हमले में मारे गए थे और 25 अन्य घायल हुए थे।

वर्ष 2002 में भुल्लर को इस ब्लास्ट को दोषी मानते हुए टाडा कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई।

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केजरीवाल ने भी की रिहाई की मांग

supreme court stays execution of bhullar

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौत की सजा पाए आतंकी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की रिहाई के हक में आवाज उठा चुके हैं।

अरविंद केजरीवाल की तरफ से जंतर मंतर पर सिखों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की मांग को लेकर बैठे इकबाल सिंह को भेजे गए पत्र में साफ किया गया है कि दिल्ली सरकार ने भुल्लर की रिहाई की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी है।

पार्टी के दो विधायकों ने जंतर-मंतर जाकर एसआईटी गठन की घोषणा और भुल्लर को लेकर चिट्ठी का हवाला देकर इकबाल सिंह का अनशन खत्म कराया है।

कोर्ट के एक फैसले से जगी उम्मीद

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इसी माह सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से भुल्लर को अपनी फांसी की सजा की माफी की उम्मीद जगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 21 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका की सुनवाई में देरी के कारण 15 कैदियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

अदालत ने 13 आरोपियों की सजा राष्ट्रपति की ओर से हुई देरी के कारण कम कर दी जबकि दो अन्य आरोपियों की सजा मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण कम की गई।

इस फैसले से अदालत ने देविंदर पाल सिंह भुल्लर मामले में दिए गए अपने ही उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि दया याचिका की सुनवाई में देरी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आधार नहीं हो सकती।

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