फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   supreme court slams central government for clean ganga project.

गंगा की सफाई पर मोदी सरकार को कड़ी फटकार

Wed, 03 Sep 2014 10:33 PM IST
Updated Wed, 03 Sep 2014 10:33 PM IST
विज्ञापन
supreme court slams central government for clean ganga project.

जापान से गंगा की सफाई में मदद का वादा लेकर भारत लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।

विज्ञापन


सरकार के रवैये से नाखुश अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अभी तक किए गए उसके उपायों से तो दो सौ साल में भी गंगा की सफाई की उम्मीद नहीं दिखती।

कोर्ट ने केंद्र को तीन हफ्ते के भीतर गंगा को उसका प्राचीन गौरव बहाल करने के लिए चरणबद्ध योजना पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
विज्ञापन

 
जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर और जस्टिस आर भानुमती की पीठ ने कहा है कि सरकार की कार्य योजना देखने के बाद ऐसा लगता है कि 200 साल बाद भी गंगा साफ नहीं होगी। महत्वाकांक्षी परियोजना का मूल्यांकन करके आपको गंगा का प्राचीन गौरव बहाल करने के लिए कदम उठाने हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना है। हमें नहीं पता कि हम गंगा को उसके प्राचीन स्वरूप में देख सकेंगे या नहीं लेकिन कोशिश करें कि अगली पीढ़ी इस नदी को अपने मूल रूप में देख सके।

'ऐसे तो 200 साल में भी नहीं साफ होगी गंगा'

supreme court slams central government for clean ganga project.

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस कार्य योजना के प्रति नौकरशाही वाला नजरिया गंगा को स्वच्छ बनाने की प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने में मददगार नहीं होगा।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दूसरे देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता को लेकर चिंता नहीं है। चिंता यह है कि 2525 किमी लंबी नदी की सफाई परियोजना पर काम करने के बारे में आम आदमी को कैसे समझाएंगे।

पीठ ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा नवीनीकरण मंत्रालय के हलफनामे को देखने के बाद सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से कहा कि हम समितियों की बारीकियों में नहीं जाना चाहते।

गंगा की सफाई को लेकर आम आदमी को कम से कम यह तो पता होना चाहिए कि सरकार कैसे काम कर रही है। पीठ ने कहा कि आपने नौकरशाही जैसा स्पष्टीकरण दिया है। हम आम आदमी की भाषा में समझना चाहते हैं कि परियोजना पर कैसे काम किया जाएगा।

पीठ ने सरकार से विशेष रूप से कहा कि गंगोत्री से नीचे 135 किलोमीटर की नदी के पारिस्थितिकीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में अवगत कराया जाए क्योंकि 2003 की अधिसूचना के बाद से कोई कदम उठाया ही नहीं गया है।

कोर्ट ने मांगा पीपीटी प्रजेंटेशन

supreme court slams central government for clean ganga project.

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को इस मामले में तीन हफ्ते में पूरक हलफनामा देने को कहा है जिसमें मोदी सरकार को योजना के हर चरण के बारे में बताना होगा और यह भी बताना होगा कि हर चरण में सरकार की प्राथमिकता क्या होगी।

कोर्ट ने अफसरशाही तरीके के बजाय पावर प्वाइंट फॉरमेट में प्रजेंटेशन पेश करने को कहा। कोर्ट ने यह कहा है कि अगर गंगा सफाई के काम में कोई अड़चन आ रही है या कोई नगर पालिका, निगम या प्रदेश सरकार आदेशों का पालन नहीं करती तो शीर्ष कोर्ट निर्देश देने को भी तैयार है।

48 शहरों में शुरू होगा काम
गंगा की सफाई पर केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रोडमैप पेश किया था। सरकार ने कहा है कि पांच राज्यों में 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं पर कुल खर्च करीब पांच हजार करोड़ रुपये आएगा। यह खर्च राज्यों के चुनिंदा 48 शहरों में गंगा को बचाने के लिए तीन स्तरों पर कार्यों के लिए किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed