फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   supreme court sent notice to govt about safety of women

महिलाओं की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर

Wed, 02 Jan 2013 07:38 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 02 Jan 2013 07:38 PM IST
विज्ञापन
supreme court sent notice to govt about safety of women

चलती बस में युवती से हुई दरिंदगी को लेकर देशभर में हो रहे प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्र और राज्य सरकारों से एक महीने के भीतर जवाब तलब किया है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने बलात्कार के सभी मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन संबंधी एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई का निर्णय लिया है।  

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले उपायों पर चार हफ्ते के भीतर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह नोटिस 16 दिसंबर को दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद दायर दो याचिकाओं पर जारी किए हैं।
विज्ञापन


न्यायाधीश पी. सदाशिवम और रंजन गोगोई की बेंच ने वकील मुकुल कुमार की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर तलब किया है। कुमार ने अपनी याचिका में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की जांच के लिए हर शहर और कस्बे में महिला पुलिस थाने स्थापित करने और महिलाओं के खिलाफ हर तरह के भेदभाव समाप्त करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को लागू करने का अनुरोध किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बीच मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच बृहस्पतिवार को दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन संबंधी मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपों में आरोपित सांसदों और विधायकों के निलंबन की भी मांग की गई है। यह जनहित याचिका पूर्व आईएएस अधिकारी प्रोमिला शंकर ने दायर की है।


प्रोमिला चाहती हैं कि शीर्ष कोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए क्योंकि देश में हर 40 मिनट पर एक महिला दुष्कर्म की शिकार होती है और इसमें से ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं होते हैं। उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध और बलात्कार के मामलों की जांच महिला पुलिस अधिकारियों को करनी चाहिए और इन मामलों की सुनवाई महिला जजों को करनी चाहिए।  

क्या है याचिका में
जिन सांसदों और विधायकों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराध में चार्जशीट दायर हो उन्हें निलंबित करने की मांग की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed