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सुप्रीम कोर्ट ने कहा 'हर हाल में खत्म हो देवदासी प्रथा '

Sat, 13 Feb 2016 06:04 AM IST
Updated Sat, 13 Feb 2016 06:04 AM IST
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supreme court said devdasi system should be curbed

शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार की उस एडवाइजरी पर अमल करने के लिए कहा है जिसमें युवतियों को देवदासी बनाने की कुप्रथा को खत्म करने के लिए कहा गया है।

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न्यायमूर्ति एमआईए कलीफुल्लाह और न्यायमूर्ति एसए बोबडे की पीठ ने केंद्र सरकार की इस एडवाइजरी को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों केपास भेजने का आदेश दिया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर पीठ को बताया था कि वर्षों से चली आ रही इस प्रथा का खात्मा होना चाहिए। केंद्र सरकार के इस पक्ष को रिकार्ड पर लेते हुए शीर्ष अदालत ने एसएएल फाउंडेशन नामक एनजीओ की याचिका का निपटारा कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि गृह मंत्रालय ने गत 22 दिसंबर को देवदासी प्रथा खत्म करने को लेकर एडवाइजरी जारी किया था।
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उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में देवदासी प्रथा उन्मूलन संबंधी कानून पहले से ही प्रभावी हैं। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा-370 व 370 ए और इंमोरल ट्रैफिक प्रीवेंशन एक्ट में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पहले ही इस संबंध में कानून मौजूद है और केंद्र सरकार ने भी देवदासी प्रथा को समाप्त करने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर दिया है, ऐसे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वह एडवाइजरी पर अमल करें।

15 फरवरी को सौंपी जाती हैं देवदासियां

supreme court said devdasi system should be curbed

मालूम हो कि देवदासी प्रथा के तहत युवतियों को पूरी जिंदगी के लिए मंदिर के सुपुर्द कर दिया जाता है। इन युवतियों के साथ अक्सर यौन शोषण होता है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन के वकील से कहा कि अगर उनकी जानकारी में कहीं भी देवदासी प्रथा की बात सामने आती है तो वह संबंधित राज्य सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

संगठन ने पीठ को पिछली सुनवाई में यह जानकारी दी थी कि देश के कई हिस्सों में 15 फरवरी को देवदासियों को मंदिर के सुपुर्द किया जाता है।

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