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वकालत संबंधित कानून में संशोधन की है जरूरत: SC

Wed, 02 Mar 2016 10:58 PM IST
Updated Wed, 02 Mar 2016 10:58 PM IST
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Supreme Court's comment on advocates in india

वकालत करने से पहले ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन पास करने की अनिवार्यता का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि करीब 20 लाख वकीलों केबोझ तले दबे लीगल सिस्टम के लिए यह लाभदायक साबित हो सकता है।

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इस अनिवार्यता को लेकर बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) पर सवाल उठाने केएक दिन बाद चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा है कि लीगल सिस्टम में सुधार की दरकार है। इस सिस्टम में प्रवेश का रास्ता आसान नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर किसी के पास लॉ की डिग्री है, उसे वकालत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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पीठ ने सवाल उठाया कि जब अपरिपक्व डॉक्टर नहीं होने चाहिए तो अपरिपक्व वकील क्यों होने चाहिए? पीठ ने कहा कि यह तो आग लगने पर कुआं खोदने वाली बात हुई। पीठ ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने केलिए कहा है।
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परीक्षा को जारी रहने दिया जाए

Supreme Court's comment on advocates in india

हालांकि पीठ ने पाया कि इनरोलमेंट केदो साल के भीतर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन पास करने की अनिवार्यता पेशे को अपनाने का अधिकार को प्रभावित करता है। पीठ ने कहा कि परीक्षा को जारी रहने दिया जाए।

हमारा सिर्फ यह मानना है कि यह कानून की जद में हो। पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि पेशे को मजबूत करने के लिए कोई तरीका होना ही चाहिए। पीठ ने कहा कि हमारे पास पहले ही काफी संख्या में वकील है लिहाजा इस पेशे में और लोगों केआने के लिए कुछ परीक्षा होनी चाहिए जिससे कि काबिल वकील इस पेशे में आए, जिसकी हमें दरकार है।

पीठ ने कहा कि इस मसले का निपटारा तीन सदस्यीय पीठ द्वारा होना चाहिए। अदालत आर नागभूषण नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में वकालत करने से पहले ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन पास करने की अनिवार्यता को चुनौती दी गई है। पीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करने का फैसला करते हुए वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन को अमाइकस क्यूरी(न्यायमित्र) नियुक्त किया है।

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