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आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 07 Aug 2015 03:51 AM IST
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निजता का अधिकार मूल अधिकार है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस पर निर्णय लेगी। अगर तीन सदस्यीय पीठ अगर यह खोजने में कामयाब नहीं होती इसे संबंध में कोई फैसला आ चुका है, तो मामले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है।
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मालूम हो कि केंद्र सरकार का कहना है निजता का अधिकार मूल अधिकार केतहत नहीं आता। केंद्र सरकार की दलील है कि इस मामले को बड़ी पीठ केसमक्ष भेजा जाना चाहिए क्योंकि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट केआदेश परस्पर विरोधी हैं।
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सरकार आधार कार्ड के बचाव में यह दलील दे रही है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है कि जिसमें दावा किया गया है कि आधार कार्ड के लिए ली जाने वाले बायोमेट्रिक जानकारी निजता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।
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राइट टू लाइफ का हिस्सा
केंद्र सरकार का कहना है कि वर्ष 1954 और 1963 में दो संवैधानिक पीठ ने
कहा था कि निजता का अधिकार मूल अधिकार नहीं है। और इसकेबाद कोई भी बड़ी
पीठ ने उसे दरकिनार नहीं किया है।
हालांकि कुछ छोटी पीठ ने निजता केअधिकार को राइट टू लाइफ का हिस्सा बताया है। इस तरह परस्पर विरोधी फैसलों के कारण मामले को संवैधानिक पीठ केपास भेजा जाना चाहिए
हालांकि कुछ छोटी पीठ ने निजता केअधिकार को राइट टू लाइफ का हिस्सा बताया है। इस तरह परस्पर विरोधी फैसलों के कारण मामले को संवैधानिक पीठ केपास भेजा जाना चाहिए