याकूब मेनन की फांसी की सजा बरकरार
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सु्प्रीम कोर्ट ने 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के दोषी याकूब मेनन की फांसी की सजा बरकरार रखी है। याकूब मेनन की फांसी की सजा पर दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याकूब को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार किया है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच ने 10 दिसंबर 2014 को याचिका को सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच में भेज दिया था जिसकी सुनवाई मंगलवार को हुई।
1993 सीरियल ब्लास्ट मामले में याकूब मेनन भाई टाइगर मेनन पर भी ब्लास्ट में षडयंत्र रचने का आरोप था जो पिछले दो दशक से ज्यादा समय से जेल में बंद है।
याकूब की दलील को खारिज किया
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, याकूब मेनन को फांसी की सजा का एक ऐसा मामला जिस पर कोर्ट की ओर से कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया था।
मामने की सुनवाई कर रही कोर्ट ने 2006 में याकूब मेनन को आतंकवाद और विनाशक गतिविधि निरोधी कानून के तहत आपराधिक षडयंत्र रचने और ब्लास्ट में शामिल रहे लोगों को एअर टिकट उपलब्ध कराके पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग के लिए भेजने का दोषी पाया था।
मेनन को दोषी ठहराने का सबूत ब्लास्ट में शामिल रहे अपराधियों के बयानों को माना गया था। याकूब की फांसी पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि याकूब ने खुद के भारत में न होने पर अपने छोटे भाई टाइगर मेनन की भूमिका भी तय की थी।
याकूब की याचिका में फांसी की सजा माफ करने के लिए यह दलील दी गई थी कि किसी अपराधी को एक की अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकती क्योकि याकूब पहले से 20 साल से ज्यादा का वक्त में जेल में गुजार चुका है।