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यूपी बीएड: सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई सरकार की मांग

Sat, 30 Nov 2013 01:08 AM IST
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 30 Nov 2013 01:08 AM IST
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supreme court rejected demand of up govt at b.ed session

उत्तर प्रदेश में बीएड सत्र के लिए निर्धारित समय सारिणी नीति में बदलाव की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है।

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सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि नीति में बदलाव के लिए अगले वर्ष आग्रह कर सकती है। लेकिन मौजूदा वर्ष इसमें परिवर्तन के लिए अदालत कोई आदेश नहीं जारी करेगी। शीर्षस्थ अदालत के निर्देश पर 2011-12 के सत्र के दौरान प्रदेश सरकार ने नीति तैयार की थी।

यूपी सरकार ने तब सर्वोच्च अदालत में हलफनामा देकर वर्ष 2012 के बाद बीएड सत्र के लिए समय सारिणी नीति तय किए जाने की सूचना दी थी। इस सारिणी का सभी संस्थानों को पूरी गंभीरता से पालन करना अनिवार्य किया गया है। ताकि छात्रों के भविष्य से कोई भी खिलवाड़ ना हो।
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जस्टिस एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एमआर शमशाद ने कहा कि अदालत के निर्देश पर समय सारिणी नीति प्रदेश सरकार की ओर से तय की गई थी। लेकिन इस नीति के चलते कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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राज्य सरकार इस नीति में संशोधन चाहती है। पीठ ने कहा कि अदालत इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है कि नीति में फिलहाल बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है।

जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस नीति में बदलाव करेगी। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत बदलाव की अनुमति देने के संबंध में कोई आदेश नहीं जारी करेगी। यदि राज्य सरकार चाहे तो अगले वर्ष यह आग्रह कर सकती है।

गौरतलब है कि 2009-10 को शून्य घोषित करने के शासनादेश के खिलाफ यह मसला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। तब बीते कई सालों से निजी संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों का भविष्य राज्य सरकार की असहमति के चलते खराब हो रहा था।

इसी वजह से अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार और निजी संस्थानों को आपसी सहमति से रास्ता निकालने को कहा था। तब राज्य सरकार ने बीएड के सत्र-2011-12 की प्रवेश परीक्षा, उसके परिणाम और सत्र की तिथियां निर्धारित कर अदालत में पेश की थीं। साथ ही आगे के वर्षों के लिए नीति तय की थी।

क्या है समय सारिणी नीति
वर्ष 2012 के बाद हर साल नवंबर में बीएड प्रवेश परीक्षा का विज्ञापन दिया जाएगा। नीति के तहत बीएड के फॉर्म 10 नवंबर से 15 दिसंबर तक उपलब्ध रहेंगे और जनवरी माह के किसी भी सप्ताह में शनिवार-रविवार को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।


प्रवेश परीक्षा के परिणाम 10 से 15 मार्च के बीच हर हाल में छात्रों तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद 20 मई से 20 जून तक काउंसिलिंग आयोजित की जाएंगी। इस प्रक्रिया का अंत 30 जून तक हर साल होगा और एक जुलाई से संस्थानों में पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

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