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कोली को फांसी पर चढ़ाने का रास्ता साफ

Thu, 30 Oct 2014 08:33 AM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 08:33 AM IST
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supreme court rejected death sentence review plea surinder koli.

नर पिशाच सुरेंद्र कोली की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे फांसी के तख्ते तक ले जाने का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च अदालत ने निठारी के बलात्कार और सिलसिलेवार हत्याकांड के दोषी सुरेंद्र कोली की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।

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कोली ने हत्या के मामलों में से एक में उसे दोषी ठहराने और उसकी मौत की सजा बरकरार रखने के निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था।

चीफ जस्टिस एचएल दत्तू, जस्टिस अनिल दवे और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की बेंच ने कहा कि हम पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं। हमें अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार के लिए इसमें कोई आधार नजर नहीं आता।
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कोली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया और कहा कि अभियुक्त का इकबालिया बयान झूठा था और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि एक निर्दोष की जिंदगी किसी भी दूसरी चीज से अधिक महत्वपूर्ण है। मैं हतप्रभ हूं कि ऐसा न्यायपालिका में कैसे हो सकता है।
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कोली के इकबालिया बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभियुक्त को पुलिस ने पीड़ितों के सिर्फ नाम ही नहीं बल्कि अपराध करने के तरीके को भी याद करने के लिए कहा था। अभियुक्त का यह भी कहना था कि उसे यातना दी गई। लेकिन इस तथ्य पर न तो निचली अदालत ने और ना ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया।

राम जेठमलानी ने किया था बचाव

supreme court rejected death sentence review plea surinder koli.

जेठमलानी ने यह भी आरोप लगाया कि अभियोजन ने एक सर्जन की शव परीक्षण रिपोर्ट के बारे में महत्वपूर्ण सूचना दबा ली, जिसमें कहा गया था कि शवों को सर्जिकल औजारों से काटा गया था।

इस सर्जन से निचली अदालत में पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह अंगों के कारोबार का मामला हो जिसे किसी चिकित्सक ने किया हो और जिसके लिए एक निर्दोष व्यक्ति को फांसी दी जा रही है। इस पर बेंच ने कहा कि आप पहली बार इस मामले में नए तथ्य पेश कर रहे हैं। जहां तक इकबालिया बयान का सवाल है तो ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस पर सुनवाई कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने आठ सितंबर को कोली को नोएडा के निठारी गांव के एक मकान में 2006 में बच्चों की हत्या के जुर्म में दी जाने वाली फांसी पर एक सप्ताह के लिये रोक लगा दी थी। बाद में 12 सितंबर को अदालत ने कोली की मौत की सजा पर अमल पर 28 अक्टूबर तक के लिए रोक की अवधि बढ़ा दी थी।

कोली को मेरठ में आठ सितंबर को फांसी दिए जाने से कुछ घंटे पहले ही वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह के नेतृत्व में वकीलों के एक दल ने उसकी सजा पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के 24 जुलाई, 2014 के आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था। इस आदेश में अदालत ने कोली की मौत की सजा के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध ठुकरा दिया था।

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