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टेलीकॉम कंपनियों को करारा झटका, ग्राहकों को मिलेगा फायदा!

Fri, 18 Apr 2014 08:02 AM IST
Updated Fri, 18 Apr 2014 08:02 AM IST
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supreme court reject plea of telecom companies

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के साथ आय में भागीदारी की व्यवस्था के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने वाली लगभग सभी निजी कंपनियों को सरकारी आडिटर कैग के दायरे में ला खड़ा किया है।

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बृहस्पतिवार को सर्वोच्च अदालत ने व्यवस्था दी कि भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक(कैग) निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के खाते का ऑडिट कर सकता है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ऐसी निजी कंपनियों के बही खातों का कैग की ओर से लेखा-परीक्षण जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार को गैरकानूनी तरीके से कोई नुकसान न हो।
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क्योंकि ऐसे उदाहरण मिले हैं जिनमें सरकार ने कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनके साथ मिलीभगत से काम किया। शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार या उसकी कोई संस्था अथवा यहां तक कि सेवा प्रदाताओं जैसी निजी पार्टियां भी यदि स्पेक्ट्रम जैसी देश की प्राकृतिक संपत्ति का कारोबार कर रही हों तो वे जनता और संसद के प्रति जवाबदेह हैं।

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कैग करेगा कंपनियों के खातों की जांच

supreme court reject plea of telecom companies

जस्टिस के.एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कैग ऑडिट के खिलाफ दूरसंचार कंपनियों की ओर से दायर अपीलों को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।

कंपनियों ने दलील दी थी कि कैग उनके खातों का ऑडिट नहीं कर सकता। बेंच ने कहा कि कैग इस बात के आकलन के लिए ऑडिट कर सकता है कि कंपनियां सरकार को अपनी आय में से उचित हिस्सा दे रही हैं या नहीं।

याचिका दायर करने वालों में एसोसिएशन ऑफ यूनिफाइड टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एयूटीएसपी) और सेल्यूलर आपरेटर्स ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) शामिल हैं।

इस निर्णय से सरकार का भरेगा खजाना

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सर्वोच्च अदालत ने फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसे इन याचिकाओं में चुनौती दी गई। साथ ही कैग को टेलीकॉम समेत सभी उन निजी कंपनयों के खातों के आडिट का अधिकार प्रदान कर दिया है। जो सार्वजनिक-निजी साझेदारी या प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित हैं।

पीठ ने कहा कि है कि यह ऑडिट किसी भी तरह से वैधानिक या विशेष नहीं होगा। लेकिन हम स्पष्ट करते हैं कि खातों की जांच से यह साफ हो जाएगा कि किसी तरह से राजस्व का नुकसान तो नहीं हो रहा। हाईकोर्ट ने इन कंपनियों के खातों के कैग की ओर से ऑडिट को हरी झंडी दी थी।

याद रहे कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि कैग का यह कर्तव्य है कि वह दूरसंचार कपंनियों के खातों का ऑ़डिट करे।  क्योंकि उनकी आय का कुछ हिस्सा भारत के समेकित कोष (कन्सोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया) में जाता है।

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