बुरे फंसे रामदेव, एक और करारा झटका
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दलित महिलाओं और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में फंसे बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अंतरिम राहत प्रदान करने से इनकार कर दिया।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अभी इस मामले में निचली अदालत की ओर से समन भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से हस्तक्षेप उचित नहीं।
योग गुरु ने अपने खिलाफ विभिन्न स्थानों पर दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
अभी तक नहीं हुआ समन जारी
चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने रामदेव से कहा कि उनका मसला अभी परिपक्व नहीं है, क्योंकि किसी भी अदालत ने उन्हें अब तक समन नहीं जारी किया है।
साथ ही पुलिस की ओर से भी उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है। पीठ ने यह बात रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी से कही। पीठ में जस्टिस मदन बी. लोकुर व जस्टिस कुरियन जोसफ भी शामिल थे।
पीठ ने रोहतगी से कहा कि यह मसला तब अलग हो जाएगा, जब देश के विभिन्न हिस्सों की अदालतें आपके मुवक्किल को समन जारी करेंगी।
12 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं
रोहतगी ने पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ चार दिनों के भीतर 12 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके चलते देशभर में चलाया जा रहा उनका योग कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
उन्होंने मांग की कि शीर्षस्थ अदालत सभी एफआईआर अपने पास स्थानांतरित कर ले, जो व्यक्तिगत तौर पर लोगों ने विभिन्न स्थानों पर दर्ज कराई हैं और लखनऊ के न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष समेत अन्य अदालतों में भी दी गई हैं।
हालांकि पीठ ने रोहतगी के तर्क से असहमति जताते हुए कहा कि अदालत इस मामले में फिलहाल कोई आदेश नहीं जारी करेगी।
दलितों के घर हनीमून की बात की थी
बाबा रामदेव ने 25 अप्रैल को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि राहुल गांधी दलितों के घर सिर्फ हनीमून और पिकनिक मनाने जाते हैं।
उन्होंने कहा था कि अगर राहुल गांधी किसी दलित युवती से शादी कर लिए होते तो उनका भाग्य खुल जाता और वह अब तक प्रधानमंत्री बन गए होते।
विवाद बढ़ने पर बाबा ने कहा था कि उनके बयान को तोड़ मोड़कर पेश किया गया है। वैसे बाद में उन्होंने माफी मांग ली थी।