पशु बलि रोकने की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
धार्मिक उत्सवों के दौरान होने वाली पशुओं की बलि पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न मान्यताओं केबीच सद्भावना बनाए रखना जरूरी है।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत केलिए सभी धर्मों और मान्यताओं केबीच सद्भावना बनाए रखना जरूरी है। यह बेहद नाजुक मसला है। लोगों द्वारा सदियों से चले आ रहे प्रचलन को कोर्ट कैसे नजरअंदाज कर सकता है।
याचिका तमिलनाडु के पत्रकार वी राधाकृष्णन ने दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कि किसी भी धर्म या मान्यता के तहत पशुओं की होने वाली बलि की प्रथा को असंवैधानिक करार दिया जाना चाहिए।
पशुओं की बलि प्रथा संविधान का उल्लंघन
याचिका में कहा गया था कि पशुओं की बलि की प्रथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14, 21, 29 और 30 का उल्लंघन है। याचिका में प्रीवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल एक्ट, 1960 के खंड-28 को असंवैधानिक करने की मांग की गई है, जहां तक धर्म के नाम पर पशुओं को मारने की प्रथा को छूट मिलने की बात है।
याचिका में कहा गया था कि यह पशुओं के साथ अत्याचार है। आमतौर पर बलि खुले में होते हैं। बच्चे भी इसे देखते हैं। बलि प्रथा बहुत पुरानी और बर्बर प्रथा है। अंधविश्वास ने इस प्रथा को जन्म दिया है।