सीएम अखिलेश को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट चक गजरिया आईटी सिटी के निर्माण पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने एनजीओ की ओर से दायर याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एनजीओ वी द पिपल की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने अंतरिम रोक लगाए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए अदालत को राज्य की ओर से बड़े स्तर पर कराए जा रहे निर्माण कार्य पर रोक लगानी चाहिए।
हालांकि पीठ ने अंतरिम रोक की गुजारिश पर निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार से एनजीओ की अर्जी पर जवाब देने को कहा।
इस मामले में केंद्र सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सही करार देते हुए याचिका को खारिज किए जाने की दलील सुप्रीम कोर्ट में दे चुकी है। साथ ही कहा था कि याचिकाकर्ता को इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
'जमीन का अधिग्रहण नहीं कर रही सरकार'
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने अपने हलफनामे में खास तौर पर एनजीओ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के कदम को गलत करार देते हुए कहा कि चक गजरिया फार्म में सौ एकड़ भूमि पर प्रस्तावित आईटी सिटी और मेडिकल सिटी का मुद्दा पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसका निपटारा करने का अधिकार एनजीटी को है।
एनजीओ को हाईकोर्ट ने एनजीटी जाने का विकल्प दिया, क्योंकि ट्राइब्यूनल का गठन केंद्र की ओर से प्राकृतिक संसाधनों या पर्यावरण से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए किया गया है। इस मसले पर दायर याचिका स्वीकार योग्य और तर्कपूर्ण नहीं है।
गौरतलब है कि यूपी सरकार पहले ही अदालत को सूचित कर चुकी है कि इस जमीन का राज्य सरकार अधिग्रहण नहीं कर रही। भूमि एक सरकारी विभाग से दूसरे विभाग को स्थानांतरित की जा रही है। इसमें आईटी सिटी, कैंसर संस्थान, सुपर स्पेशलिटी सेंटर, डेरी विभाग और प्रशासनिक अकादमी स्थापित की जानी है।
हाईकोर्ट ने एनजीओ की जनहित याचिका का निपटारा कर उसे एनजीटी जाने को कहा था लेकिन गैर सरकारी संगठन ने शीर्षस्थ अदालत में याचिका दायर की।