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‘गांधी’ को जाति बनाने से कोर्ट का इंकार

Fri, 20 Dec 2013 08:51 AM IST
एजेंसी/दिल्ली
एजेंसी/दिल्ली Updated Fri, 20 Dec 2013 08:51 AM IST
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Supreme court refused to disclose gandhi's caste

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरजातीय विवाहों से पैदा संतानों को ‘गांधी’ जाति के तहत रखने की मांग खारिज कर दी है। एक स्वतंत्रता सेनानी ने जनहित याचिका दायर कर यह मांग की थी।

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जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई ने यह मांग रखने वाले 86 वर्षीय गांधीवादी सलेम वेलु गांधी उर्फ सी वेलु से कहा कि वह इस मामले में समाधान के लिए सरकार के पास जा सकते हैं।
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वेलु का कहना था कि ऐसी संतानों को ‘गांधी’ जाति के तहत रखने पर जातिविहीन समाज बनाने में मदद मिलेगी। याचिका दायर करने वाले स्वतंत्रता सेनानी वेलु खुद बेंच के सामने मौजूद थे और अपने समर्थन में संदर्भ सामग्री भी लाए थे।
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लेकिन बेंच ने इस मामले पर विचार करना उचित नहीं समझा। इस तरह यह जनहित याचिका खारिज हो गई।

हालांकि बेंच ने कहा कि अदालत इस मामले पर विचार करना जरूरी नहीं समझती। लेकिन वेलु चाहें तो इस मामले के समाधान के लिए सरकार के पास जा सकते हैं।

वेलु की याचिका में कहा गया था जाति विहीन समाज के लिए ‘गांधी’ नाम की एक जाति होनी चाहिए। इसमें उन बच्चों को रखा जाना चाहिए, जो अंतर जातीय वैवाहिक संबंधों से पैदा हुए हों।


इससे उन्हें पुरानी जाति व्यवस्था का दंश नहीं झेलना पड़ेगा। पैदा होते समय बच्चे किसी जाति का निशान लेकर नहीं आते। समाज उन्हें जाति का तमगा देता है।

पूरी हिंदू जाति 9,500 जातियों में बंटी हुई है। यहां तक कि मुसलिमों में भी कई उप जातियां हैं। जाति के नाम पर होने वाले भेदभाव की वजह से ही देश को गुलामी का लंबा दौर देखना पड़ा।

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