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एनआरएचएम: अभियोग चलाने की मंजूरी में देरी क्यों

Tue, 15 Jan 2013 07:38 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 15 Jan 2013 07:38 AM IST
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supreme court raps uttar pradesh govt for delay in prosecution in nrhm scam

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि एनआरएचएम घोटाले में आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी देने में उसकी ओर से देरी क्यों हो रही है। इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार की ओर से मंजूरी देने में देरी किए जाने और लापरवाही बरतने की शिकायत की है। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले को वापस हाईकोर्ट भेजे जाने का भी संकेत दिया है।

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जस्टिस डीके जैन की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने बताया कि जांच एजेंसी राज्य सरकार से कई आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी मांग चुकी है, लेकिन कई रिमाइंडर के बावजूद यूपी सरकार की ओर से अब तक मंजूरी नहीं दी गई है।
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इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता के बारे में जानना चाहा, लेकिन वे नदारद थे। इसके बाद पीठ ने निर्देश दिया कि अधिवक्ता राज्य सरकार से जानकारी हासिल कर देरी की वजह कोर्ट को बताएं। साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई अगले सोमवार (21 जनवरी) तक के लिए टाल दी और राज्य सरकार से अगली सुनवाई पर मामले की विस्तृत सूचना कोर्ट में पेश करने को कहा।
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साथ ही पीठ ने सीबीआई से पूछा है कि आखिर इस मामले को वापस हाईकोर्ट क्यों न भेज दिया जाए, क्योंकि हाईकोर्ट इस मामले पर लगातार निगाह रखकर जल्द इसका निपटारा कर सकती है। गौरतलब है कि एनआरएचएम घोटाला मामले में पूर्ववर्ती बसपा सरकार के कई मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी सीबीआई जांच के घेरे में हैं।

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