सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने पर लगाया 5 लाख का जुर्माना, वजह है मजेदार
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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उसे वापस लेना केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को बेहद महंगा पड़ा है। शीर्ष अदालत ने वादी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है।
अदालत का समय नष्ट करने के कारण वादी को यह सजा दी गई है।केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने एक मामले में एस्सार पावर एमपी लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष होनी थी।
जैसे ही सुनवाई शुरू हुई वादी के वकील ने पीठ से कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहते हैं। कृपया उनके आग्रह को स्वीकार किया जाए लेकिन न्यायमूर्ति गोगई ने वादी के इस रुख पर कड़ी आपत्ति जताई।
कड़े कदम उठाने के लिए मशहूर
न्यायमूर्ति गोगई ने पाया कि याचिका वापस लेने को लेकर वादी की ओर से पूर्व
सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि पीठ ने 800 पन्नों की याचिका को
पढ़ा है। इस पर काफी वक्त खर्च किया गया है और अब याचिका वापस लेने की
गुहार की जा रही है।
पीठ ने वादी से कहा कि आप ऐसा नहीं कर सकते। आप जब
चाहे जो करें, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति रंजन गोगई ने
वादी से कहा कि अगर वह याचिका वापस लेना चाहते हैं तो उन्हें पांच लाख
रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।
जस्टिस गोगई कड़े कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को उसके कामकाज को लेकर फटकारा था। वह डीएलएफ मामले की गलत तरीके से (आउट ऑफ टर्न) लिस्टिंग को लेकर खफा थे।
अगस्त में वह उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने याचिकाओं में हो रही लेखन की गलतियों के लिए बार को लताड़ा था। वहीं, करीब तीन हफ्ते पहले एक मामले की सुनवाई के दौरान एक वरिष्ठ पत्रकार से कहा कि आप अपनी जगह पर खड़े रहिए। जज और वकील के इतने पास न आएं।