दो हफ्ते में डांस बार को लाइसेंस देना शुरू करें सरकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को दो हफ्ते में डांस बार खोलने के लिए दोबारा खोलने के लिए लाइसेंस जारी करने का काम शुरू करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियों को नकाराते हुए उसे डांस बार पर प्रतिबंध हटाने के आदेश का पालन करने के लिए कहा है।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति पीसी पंत की पीठ ने राज्य सरकार को सख्त शब्दों में कहा कि 15 अक्टूबर के आदेश का पालन करने और डांस बार के लाइसेंस के लिए आवेदन को स्वीकार करने के लिए कहा है। पीठ ने योग्य आवेदनकर्ताओं को लाइसेंस जारी करने के लिए कहा है। पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से कहा कि अथॉरिटी को अदालत के आदेश का सम्मान करना चाहिए।
साल्वे ने पीठ को भरोसा दिलाया कि आदेश का पालन किया जाए हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा सामाजिक प्रमाण है जो यह दर्शाता है कि डांस बार जानवरप्रवृति की तरह है। साल्वे ने हालांकि यह कहा कि डांस बार सामाजिक बुराई है और इससे नौजवानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कई संस्थाएं हैं जो राज्य सरकार केइस पक्ष का समर्थन करती हैं कि डांस बार पर पूरी तरह प्रतिबंध होना चाहिए।
'सदियों से चली आ रही है परंपरा'
इस पर पीठ ने कहा कि वे संस्थाएं अतिधर्मनिष्ट हैं? पीठ ने कहा कि डांस परफॉरमेंश सिर्फ इन बार में ही नहीं होते हैं। पीठ ने साल्वे से कहा कि सदियों से भारत में नृत्य को सम्मान दिया जाता रहा है और आप इसे सामाजिक बुराई कह रहे हैं। पीठ ने यह कहा कि इससे सिर्फ विधि-व्यवस्था की परेशानी आ सकती है, जिसे नियंत्रण करने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि हम पहले ही कह चुके हैं कि डांस में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि कई महिलाएं नृत्य में प्रशिक्षित होती हैं। पीठ ने यह भी कहा कि क्या महिलाओं को अपनी आजीविका केलिए डांस करने से महरूम किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि यह इस पर क्यों विचार करें नृत्य में कुछ गलत है और यह सामाजिक बुराई है जबकि संविधान के अनुच्छेद-19(1)(जी) इसकी इजाजत देता है। यह प्रावधान किसी को अपना पेशा चुनने की इजाजत देता है। जिसके बाद साल्वे ने कहा कि राज्य सरकार हलफनामे के जरिए यह बताने की कोशिश करेगी कि आखिरकार वह डांस बार को दोबारा खोलने का क्यों विरोध कर रही है।
मालूम हो कि गत 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के उस प्रावधान पर रोक लगा दी थी जिसमें होटल, रेस्तरां और बार में डांस पर रोक लगाई गई थी। हालांकि अदालत ने साफ कहा था कि ड्रांस परफॉरमेंस में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए।