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इस फैसले से 5 सरकारों की छवि धूमिल

Thu, 25 Sep 2014 12:58 PM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 12:58 PM IST
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Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Government Officers in Coal Scam

कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बीते 21 साल के दौरान सत्ता में रही पांच सरकारों के चेहरे पर कालिख पोत दी है।

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चूंकि इन 21 सालों में सर्वाधिक अवधि 13 साल तक कांग्रेस या उसकी अगुवाई वाली सरकार शासन में रही, इसलिए फैसले की कालिख भी सबसे ज्यादा उसी के हिस्से में आई।

सुप्रीम कोर्ट ने अनियमितताओं के कारण जिन 214 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया है, उनमें सबसे ज्यादा आवंटन नरसिंह राव और मनमोहन सरकार के दो कार्यकाल के दौरान हुए।
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इसके बाद करीब छह साल तक केंद्र की सत्ता में रही वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में आवंटन हुआ। सबसे कम आवंटन गुजराल सरकार के कार्यकाल में हुआ था। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद करीब-करीब सभी राजनीतिक दल सवालों के घेरे में हैं, इसलिए इनकी ओर से बेहद संभल कर प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है।
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कोर्ट ने रद्द किए कोल ब्लॉक आवंटन

Supreme Court judgement on Coal Blocks Allocation - Government Officers in Coal Scam

कांग्रेस जहां वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान आवंटित हुए आवंटन को रद्द करने के बहाने खुद पर हो रहे हमले की धार कम करने का प्रयास करती दिखी, वहीं भाजपा ने महज यूपीए सरकार के दो कार्यकाल के दौरान हुए आवंटन का मामला उठा कर वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में हुए आवंटन को रद्द करने के फैसले से किनारा करती दिखी।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जद में आने वाली पहली सरकार नरसिंह राव की नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार है। उसके बाद वाजपेयी सरकार के 13 दिन के कार्यकाल को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवगौड़ा और उसके बाद कांग्रेस के ही समर्थन से इंद्रकुमार गुजराल की सरकार बनी।

गुजराल के बाद वाजपेयी के नेतृत्व में 13 महीने और करीब पांच साल की अवधि वाली दो सरकारें आईं। वाजपेयी सरकार की विदाई के बाद वर्ष 2004 से वर्ष 2014 के मई महीने तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। इसी सरकार के कार्यकाल में कैग ने कोल ब्लॉकों के आवंटन में अनियमितता की बात कही।

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