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गुरुद्वारों के नियंत्रण पर रहे यथास्थिति: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 08 Aug 2014 11:58 AM IST
Updated Fri, 08 Aug 2014 11:58 AM IST
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supreme court on gurudwara

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (एचएसजीएमसी) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (एसजीपीसी) को हरियाणा के गुरुद्वारों में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

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सर्वोच्च अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए।

चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की बेंच ने कहा कि बृहस्पतिवार को दोपहर ढाई बजे अंतरिम आदेश जारी करते समय तक जो गुरुद्वारे, जिस समूह के नियंत्रण में हैं, वह अगले आदेश तक उसी स्थिति में रहेंगे।

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अगली सुनवाई 25 अगस्त को

supreme court on gurudwara

हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि एचएसजीएमसी ने राज्य के 6-7 गुरुद्वारों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। राज्य सरकार के इस दावे का एसजीपीसी ने खंडन किया। एसजीपीसी ने कहा कि उसके विरोधी गुट ने सिर्फ कुरुक्षेत्र में स्थित गुरुद्वारे को कब्जे में लिया है। पीठ ने कहा कि हरियाणा सरकार के कथन पर यकीन करने का कोई कारण नजर नहीं आता।

अदालत ने हरियाणा सरकार से कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने का हर संभव प्रयास किया जाए। राज्य के पुलिस महानिदेशक तथा सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी सूरत में शांति भंग नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि वे अपने अलग-अलग बैंक खाते खोलें तथा चढ़ावे की रकम नए अकाउंट में जमा करे। पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख 25 अगस्त तय की है।

'स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में'

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हरियाणा सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अदालत को बताया कि राज्य में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसी भी संभावित घटना को रोकने में सक्षम है। संवेदनशील जगहों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गृह मंत्रालय द्वारा तैयार आईबी की रिपोर्ट अदालत में पेश की। हरियाणा सरकार ने राज्य के कुल 52 गुरुद्वारों को तीन अलग सूचियों में रखा है। ऐतिहासिक सात गुरुद्वारों को प्रथम अनुसूची में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए कानून की वैधता को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की जाएगी लेकिन अदालत समाज में किसी तरह का तनाव नहीं चाहती। अदालत की चिंता कानून व्यवस्था को लेकर है। समय बहुत बलवान है। कई विवाद समय के साथ सुलझा लिए जाते हैं। सभी पक्ष शांति बनाए रखें तो अदालत को इस विवाद का निपटारा करने में देर नहीं लगेगी।

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सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को यह स्पष्ट किया कि सिख गुरुद्वारा समिति के मामले में अदालत इस पर गौर करेगी कि हरियाणा की विधायिका को इस तरह का कानून पारित करने का अधिकार है या नहीं।

हरियाणा निवासी और एसजीपीसी के सदस्य हरभजन सिंह द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि पंजाब पुनर्गठन कानून 1966 की धारा 72 कहती है कि इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेट के रूप में एसजीपीसी के संदर्भ में कानून बनाने की शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास है और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राज्य का कानून बनाकर इसे विभाजित किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि जल्दबाजी में कानून लागू करना न केवल संवैधानिक प्रावधानों और पंजाब पुनर्गठन कानून के वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है, बल्कि सिख धर्म के अनुयायियों में मतभेद पैदा करने के लिए इरादों से विभाजक भी है। याचिका में कहा गया कि कानून के तहत, हरियाणा एक ऐसे विषय के संबंध में कानून नहीं बना सकता जहां पहले से ही केंद्रीय कानून लागू है। याची ने इस आधार पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा कानून को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा है कि यह संविधान के दायरे से बाहर है।

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