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मायावती की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Sat, 18 Jan 2014 01:50 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 18 Jan 2014 01:50 AM IST
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supreme court notice to Mayawati CBI on plea to lodge fresh FIR agst her

आय से अधिक संपत्ति मामला खारिज होने के करीब डेढ़ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर बसपा प्रमुख मायावती और सीबीआई को नोटिस जारी किया है।

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दायर याचिका में इस मामले में नए सिरे से एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि तकनीकी आधार पर कोर्ट की ओर से एफआईआर रद्द किए जाने के बाद सीबीआई को ताजा मामला दर्ज करने के लिए उपयुक्त सलाह लेनी चाहिए थी।

चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कमलेश वर्मा की याचिका पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया। पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और सीबीआई सहित सभी पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।
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सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता और बसपा सदस्य सतीश मिश्रा की उन दलीलों को दरकिनार कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह राजनीति से प्रेरित है।

पीठ ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सीबीआई को उपयुक्त सलाह लेनी चाहिए थी और उसके आधार पर काम करना चाहिए था।

पीठ ने अप्रत्यक्ष रूप से अपने 2012 के फैसले का हवाला दिया जिसमें तकनीकी आधार पर मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से जुड़े मामले को खारिज कर दिया था। एजेंसी के समक्ष उनके खिलाफ ताजा मामला दर्ज करने का विकल्प खुला रखा गया था।
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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कोर्ट का काम हरेक आयामों पर आदेश जारी करना नहीं है। पीठ ने पूछा कि क्या सीबीआई को हमेशा निर्देश जारी करना ही अदालत का काम है।

याद रहे कि सर्वोच्च अदालत ने जुलाई, 2012 के फैसले में मायावती के खिलाफ नौ साल पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले को इस आधार पर खारिज किया था कि एजेंसी ने 2003 के उसके आदेश को बिना ठीक ढंग से समझे ही आगे बढ़ाया जो ताज कॉरिडोर में कथित तौर पर बिना मंजूरी के यूपी सरकार के 17 करोड़ रुपए जारी होने तक ही सीमित है।


इसके बाद मई, 2013 में सर्वोच्च अदालत ने जुलाई, 2012 के फैसले की समीक्षा करने की याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखते हुए स्पष्ट किया था कि उसके पिछले फैसले में सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में मायावती के खिलाफ आगे कार्रवाई करने का अधिकार वापस नहीं लिया है।

सर्वोच्च अदालत ने 8 अगस्त 2013 को मायावती के खिलाफ अपने फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिका पर गौर करने से इंकार कर दिया था।

इससे पहले हाईकोर्ट ने विशेष जज सीबीआई के उस आदेश को कानून सम्मत करार दिया था जिसमें मायावती व सिद्दीकी को अभियोजन स्वीकृति के अभाव में मुकदमे की कार्यवाही से छूट प्रदान की गई थी।

सीबीआई अदालत के फैसले को वर्मा, अनुपमा सिंह, काशी प्रसाद यादव, मोहम्मद कातील अहमद, शचींद्र प्रताप सिंह और ममता सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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