बांग्लादेश सीमा की हो पूर्ण बाड़बंदी: सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने कहा कि गैरकानूनी तरीके से भारत में आने वाले विदेशियों से राज्य की संस्कृति को खतरा है। न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति रोहिंगटन नरीमन की पीठ ने केंद्र सरकार को बांग्लादेश के साथ निर्वासन की प्रक्रिया पर बातचीत कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
अदालत ने पाया कि अवैध रूप से देश में घुस आने वाले लोगों के मामलों का निपटारा करने के लिए बनाए गए पंचाट की संख्या कम है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह गौर करने वाली बात है कि 1961 से 1965 के बीच करीब डेढ़ लाख लोगों को निर्वासित किया गया, लेकिन 1985 से लेकर अब तक सिर्फ 2000 लोगों का ही निर्वासन संभव हो सका है।
बांग्लादेशी सीमा पर पूरी तरह बाड़बंदी का आदेश
बांग्लादेशियों के अवैध रूप से भारत में घुस आने से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि वह आज से हर तीन महीने में दिए गए निर्देशों पर अमल की समीक्षा करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि आजादी के 67 साल बीत जाने के बाद भी सीमा की पूरी तरह से बाड़बंदी नहीं हो सकी है।
संभव है कि निर्वासित किए गए लोग फिर से वापस आ जाएं। अदालत ने कहा कि 1985 में हुए असम समझौते के मुताबिक, 25 मार्च 1971 के बाद आए विदेशियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करना था।
साथ ही समझौते में सीमा पर पूरी तरह से बाड़बंदी की भी बात थी। इस समझौते पर केंद्र, असम सरकार और ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने हस्ताक्षर किए थे। लेकिन न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने इस दिशा में समुचित काम किया।